धनबाद: जिला परिषद में अधिकारियों की कार्यशैली और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी को लेकर अब आर-पार की जंग शुरू हो गई है। जिला परिषद उपाध्यक्ष सरिता देवी ने विभागीय लापरवाही और सूचनाओं को दबाने का आरोप लगाते हुए सीधा मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय तक योजनाओं का ब्यौरा नहीं मिला, तो वे अभियंता कार्यालय में ताला जड़ देंगी।
2022 से फाइलों में अटकी है जानकारी
उपाध्यक्ष सरिता देवी का आरोप है कि वे साल 2022 से लगातार जिला परिषद के अभियंता को पत्र लिखकर चयनित योजनाओं, निविदाओं (Tenders) और कार्यों की प्रगति रिपोर्ट मांग रही हैं। लेकिन विभाग की ओर से न तो कोई जवाब दिया गया और न ही कोई रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई।
उपाध्यक्ष ने किन प्रमुख जानकारियों की मांग की है?
- वर्ष 2022 से अब तक स्वीकृत सभी योजनाओं की सूची।
- प्रत्येक योजना की मॉनिटरिंग रिपोर्ट और वर्तमान स्थिति।
- निविदा (Tender) प्रक्रिया का विवरण और अंतिम आवंटन की जानकारी।
- कार्य शुरू होने की तिथि, व्यय की गई राशि और कार्य पूर्णता का प्रमाण।
’पारदर्शिता की उड़ाई जा रही धज्जियां’
सरिता देवी ने कड़े शब्दों में कहा कि एक जनप्रतिनिधि को उनके ही विभाग की योजनाओं से दूर रखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर विभाग क्या छिपाना चाह रहा है? अधिकारियों की यह चुप्पी पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करती है और एक संवैधानिक पद की गरिमा की अनदेखी है।
5 जनवरी: अंतिम चेतावनी की तारीख
प्रशासनिक सुस्ती से नाराज उपाध्यक्ष ने अब निर्णायक रुख अपना लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि:
”अगर 5 जनवरी तक विभाग ने हार्ड और सॉफ्ट कॉपी में तमाम जानकारियां उपलब्ध नहीं कराईं, तो मैं खुद जाकर अभियंता के कार्यालय में ताला लगा दूंगी। अधिकारियों को अब जवाबदेह बनना ही होगा।”
विशेष टिप्पणी: जिला परिषद में जनप्रतिनिधि और नौकरशाही के बीच बढ़ता यह तनाव जिले के विकास कार्यों की गति को प्रभावित कर सकता है। अब सबकी नजरें 5 जनवरी की समयसीमा पर टिकी हैं।