चाईबासा/पश्चिमी सिंहभूम, 12 जनवरी: ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के अवसर पर आज पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्वदेशी जागरण मंच के तत्वावधान में स्वामी विवेकानंद की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। बंगाली सेवा समिति (रविंद्र भवन परिसर) में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के गणमान्य नागरिकों और मंच के सदस्यों ने स्वामी जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
सनातन संस्कृति के वैश्विक ध्वजवाहक थे स्वामी जी
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए सुजीत विश्वकर्मा और संजय कर्मकार ने स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन और उनके संघर्षों पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि स्वामी जी ने अल्पायु में ही अपनी विलक्षण प्रतिभा और दूरदर्शिता से भारतीय अध्यात्म और हिंदुत्व के विचार को विश्व पटल पर स्थापित किया।
कार्यक्रम की मुख्य बातें:
- प्रेरणास्रोत: स्वामी जी के विचार आज भी पथभ्रष्ट होते युवाओं के लिए एक मशाल की तरह हैं।
- ऐतिहासिक योगदान: शिकागो धर्म संसद से लेकर कोलकाता के बेलूर मठ की स्थापना तक, उनका हर कदम राष्ट्र निर्माण को समर्पित था।
- वर्तमान प्रासंगिकता: आज के दौर में स्वदेशी और स्वावलंबन के विचार को मजबूत करने के लिए उनके सिद्धांतों को आत्मसात करना अनिवार्य है।
युवाओं के आदर्श और भविष्य की राह
सुजीत विश्वकर्मा ने कहा, “स्वामी विवेकानंद केवल एक संन्यासी नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माता थे। उन्होंने युवाओं को आत्मविश्वास का जो मंत्र दिया, वह आज के प्रतिस्पर्धी युग में भी सबसे सटीक मार्गदर्शक है।”
उपस्थिति:
इस गरिमामयी कार्यक्रम में रामावतार राम, रवि, दिलीप साव, चंद्र मोहन तियू, जयकिशन बिरूली, कामेश्वर विश्वकर्मा, अनिल सिंहा, उल्लास नाग, दीनू पटनायक, रोहित दास, पप्पू राय सहित कई कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में स्वामी जी के बताए मार्ग पर चलने और स्वदेशी के संकल्प को गांव-गांव तक पहुँचाने का संकल्प लिया।