नोएडा, 20 जनवरी। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक हादसे के चार दिन बाद मंगलवार शाम को एनडीआरएफ (NDRF) की टीम ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार को गहरे पानी से बाहर निकाल लिया है। बीते शुक्रवार की देर रात भारी जलभराव के दौरान यह कार एक गहरे गड्ढे/अंडरपास में समा गई थी, जिससे युवराज की मौके पर ही मौत हो गई थी।
कार की हालत बयां कर रही हादसे की भयावहता
पानी से बाहर निकाली गई कार की स्थिति अत्यंत खराब है। कार के शीशे और सनरूफ पूरी तरह टूटे हुए मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पानी के जबरदस्त दबाव के कारण शीशे टूटे होंगे।
- फॉरेंसिक जांच: अब इस कार की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसे का कारण कोई तकनीकी खराबी थी या केवल प्रशासनिक लापरवाही।
प्रशासनिक एक्शन: सीईओ हटाए गए, बिल्डर गिरफ्तार
इस घटना ने नोएडा प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू हो गई है:
- सीईओ पर कार्रवाई: नोएडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) लोकेश एम. को पद से हटा दिया गया है।
- बिल्डर की गिरफ्तारी: नॉलेज पार्क पुलिस ने एमजेड विजटाउन के मालिक बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है।
- एसआईटी का गठन: मुख्यमंत्री के आदेश पर तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है।
एसआईटी ने संभाली कमान, 5 दिन में मांगी रिपोर्ट
मंगलवार दोपहर एसआईटी ने अपनी जांच औपचारिक रूप से शुरू कर दी। टीम ने नोएडा प्राधिकरण के दफ्तर में करीब दो घंटे तक दस्तावेजों की पड़ताल की और फिर सीधे घटनास्थल का रुख किया।
जांच का दायरा: एसआईटी इस बात की जांच कर रही है कि भारी जलभराव वाले क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं थे और इसके लिए कौन से अधिकारी जिम्मेदार हैं। टीम को 5 दिन के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपनी है।
एक नजर में पूरा घटनाक्रम
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समय |
घटनाक्रम |
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शुक्रवार रात |
सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार सेक्टर-150 के पास जलभराव में डूबी। |
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शनिवार-सोमवार |
सर्च ऑपरेशन और प्रशासनिक लापरवाही पर जनता का आक्रोश। |
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मंगलवार दोपहर |
एसआईटी की जांच शुरू, प्राधिकरण दफ्तर में छापेमारी। |
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मंगलवार शाम |
एनडीआरएफ द्वारा कार बरामद, बिल्डर की गिरफ्तारी। |
निष्कर्ष: युवराज मेहता की मौत ने शहरी विकास और जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। अब सभी की नजरें एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर और भी बड़े अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।