खूँटी | 16 फरवरी, 2026
खूँटी जिला उपकारा की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए सोमवार को न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय संयुक्त टीम ने औचक निरीक्षण किया। ‘बोर्ड ऑफ विजिटर्स’ और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की इस संयुक्त टीम का नेतृत्व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह DLSA अध्यक्ष रसिकेश कुमार ने किया।
इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य जेल नियमावली के तहत बंदियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं, मानवाधिकारों के संरक्षण और विधिक सहायता की उपलब्धता को सुनिश्चित करना था।
निरीक्षण दल में शामिल प्रमुख अधिकारी
इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान जिले के आला अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं:
- आर. रोनिता, उपायुक्त (DC), खूँटी
- मनीष टोप्पो, पुलिस अधीक्षक (SP)
- कमलेश बेहरा, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण
- दीपेश कुमारी, अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) सह प्रभारी जेल अधीक्षक
- डॉ. रजनी नीलम टोप्पो, सिविल सर्जन
भेदभाव मुक्त वातावरण पर विशेष जोर
निरीक्षण के दौरान संयुक्त टीम ने जेल के भीतर यह बारीकी से जांच की कि किसी भी बंदी के साथ जाति, लिंग या दिव्यांगता के आधार पर कोई भेदभाव तो नहीं हो रहा है। टीम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जेल के भीतर कोई भी बंदी अन्य बंदियों को डराने, धमकाने या प्रताड़ित करने जैसी गतिविधियों में लिप्त न पाया जाए।
सुविधाओं की जमीनी हकीकत का लिया जायजा
अधिकारियों ने जेल के विभिन्न वार्डों, रसोई और अस्पताल अनुभाग का भ्रमण किया। टीम ने बंदियों से सीधे संवाद कर निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी ली:
- स्वास्थ्य एवं उपचार: क्या बीमार बंदियों को समय पर चिकित्सीय परामर्श और दवाइयां मिल रही हैं?
- भोजन और पानी: पीने के साफ पानी और भोजन की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है या नहीं?
- विधिक सहायता: जिन बंदियों के पास निजी अधिवक्ता नहीं हैं, क्या उन्हें DLSA की ओर से सरकारी वकील और कानूनी सलाह उपलब्ध कराई जा रही है?
जेल प्रशासन को मिले कड़े निर्देश
निरीक्षण के अंत में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जेल प्रशासन और जेल में तैनात पैरा-लीगल वॉलंटियर्स (PLVs) को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि बंदियों के अधिकारों का हनन न हो और उन्हें निर्धारित मानकों के अनुसार सभी सरकारी सुविधाएं समय पर मुहैया कराई जाएं।