रांची | 16 फरवरी, 2026
झारखंड के अस्पतालों और नर्सिंग होम से निकलने वाले घातक जैव चिकित्सा अपशिष्ट (बायोमेडिकल वेस्ट) के वैज्ञानिक निस्तारण को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को झारखंड उच्च न्यायालय में बहस पूरी हो गई। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।
यह मामला राज्य के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से सीधा जुड़ा है, जिस पर आने वाले अदालती आदेश से प्रदेश की कचरा प्रबंधन व्यवस्था में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।
क्या है मुख्य मांग?
यह जनहित याचिका झारखंड ह्यूमन राइट कनफेडरेशन की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता समावेश देव ने अदालत में पक्ष रखते हुए दलील दी कि:
- राज्य में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों और पर्यावरण संरक्षण कानून के प्रावधानों का कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है।
- अस्पतालों से निकलने वाले कचरे का यदि वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं किया गया, तो यह गंभीर बीमारियों और प्रदूषण का कारण बन सकता है।
- उन्होंने राज्य में एक प्रभावी और पारदर्शी डिस्पोजल सिस्टम सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का पक्ष
सुनवाई के दौरान झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) की ओर से अधिवक्ता रिचा संचित ने बोर्ड का पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि:
- पंजीकरण: राज्य में ‘क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ प्रभावी है और सभी निजी व सरकारी अस्पताल इसके तहत पंजीकृत हैं।
- अनिवार्य डिस्पोजल: सभी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण हेतु निर्धारित डिस्पोजल सुविधाओं (Common Bio-Medical Waste Treatment Facilities) से जुड़ना अनिवार्य किया गया है।
- नियमों का पालन: बोर्ड का दावा है कि वर्तमान में नियमों के अनुरूप ही कचरे का निष्पादन किया जा रहा है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा
याचिका में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि कई क्लीनिक और छोटे नर्सिंग होम अब भी कचरे के निस्तारण में लापरवाही बरत रहे हैं। बायोमेडिकल कचरे में प्रयुक्त सुइयां, दूषित पट्टियां और अन्य संक्रामक अपशिष्ट होते हैं, जो खुले में फेंक दिए जाने पर भूजल और हवा को दूषित कर सकते हैं।
आगामी परिणाम:
अदालत के सुरक्षित रखे गए आदेश से यह स्पष्ट होगा कि क्या राज्य में मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त है या हाई कोर्ट बायोमेडिकल वेस्ट के प्रबंधन के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी करेगा। इस आदेश पर राज्य के हजारों निजी व सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की निगाहें टिकी हैं।