मैट्रिक छात्र हिरासत मामला: झारखंड हाई कोर्ट की चतरा SP को फटकार, पूछा— ‘छात्र की परीक्षा छूटने का जिम्मेदार कौन?’

रांची | 16 फरवरी, 2026

​झारखंड उच्च न्यायालय ने चतरा जिले के एक 19 वर्षीय मैट्रिक परीक्षार्थी को 10 दिनों तक अवैध पुलिस हिरासत में रखने के मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। सोमवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति एके राय की खंडपीठ के समक्ष चतरा के पुलिस अधीक्षक (SP) सुमित अग्रवाल व्यक्तिगत रूप से पेश हुए।

​अदालत ने पुलिस की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि पुलिस का काम जनता की सुरक्षा करना है, उन्हें प्रताड़ित करना नहीं।

हाई कोर्ट के कड़े सवाल: 24 घंटे का नियम कहाँ गया?

​सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने एसपी से कई तल्ख सवाल पूछे, जिसका जवाब अगली सुनवाई में विस्तार से मांगा गया है:

  • अवैध हिरासत: छात्र को 10 दिनों तक बिना किसी ठोस आधार के थाने में क्यों रखा गया?
  • संवैधानिक उल्लंघन: नियमानुसार किसी भी हिरासत में लिए गए व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश क्यों नहीं किया गया?
  • भविष्य के साथ खिलवाड़: पुलिस की इस कार्रवाई के कारण छात्र की मैट्रिक परीक्षा छूट गई, इसका जिम्मेदार कौन है?
  • दोषी पर कार्रवाई: इस गैर-कानूनी कृत्य के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?

केस डायरी पर नाराजगी: ‘तथ्यों के साथ हुई छेड़छाड़?’

​अदालत ने जब केस डायरी का अवलोकन किया, तो पाया कि उसमें विसंगतियां हैं। डायरी में 31 जनवरी को छात्र का उल्लेख तो है, लेकिन उससे पहले या बाद की उसकी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। इस पर खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि यदि छात्र संदिग्ध था, तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत जेल भेजा जाता, न कि 10 दिनों तक अवैध रूप से कैद में रखा जाता।

क्या है पूरा मामला?

​याचिकाकर्ता के वकील भास्कर त्रिवेदी ने अदालत को बताया कि:

  1. 26 जनवरी की रात: लावालौंग थाना पुलिस ने रंगदारी के एक मामले में मोबाइल को संदिग्ध बताकर छात्र को उसके घर से उठाया।
  2. अवैध शिफ्टिंग: पूछताछ के बाद उसे छोड़ने के बजाय टंडवा थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया।
  3. हेबियस कॉर्पस: जब परिजनों ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका दायर की, तब पुलिस ने आनन-फानन में छात्र को घर पहुँचा दिया।
  4. दबाव की राजनीति: आरोप है कि पुलिस अब छात्र के घर के बाहर तैनात होकर परिजनों पर केस वापस लेने का दबाव बना रही है।

पुलिस की छवि सुधारने की नसीहत

​सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार का पक्ष रख रहे अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार और उपस्थित पुलिस अधिकारियों से कहा कि पुलिस को आम जनता के बीच अपनी छवि सुधारने की आवश्यकता है। यदि छात्र को पूछताछ के बाद सम्मानपूर्वक छोड़ दिया जाता, तो समाज में अच्छा संदेश जाता।

अगली कार्रवाई:

अदालत ने चतरा एसपी को 27 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई में भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने और पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

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Author: haqeeqatnaama

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