बहराइच: “शताब्दी वर्ष जागरण का समय,” औराही के विराट सम्मेलन में गूंजा ‘पंच प्रण’ का संकल्प

बहराइच, 20 जनवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में औराही स्थित शंकर भगवान मंदिर प्रांगण में एक भव्य विराट हिन्दू सम्मेलन संपन्न हुआ। इस अवसर पर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों और प्रबुद्ध संतों ने हिन्दू समाज को जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

संघ के ‘पंच प्रण’ से होगा जन-जागरण

​सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता और क्षेत्रीय सामाजिक सद्भाव प्रमुख अशोक केड़िया ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने आगामी वर्षों के लिए ‘पंच प्रण’ का खाका प्रस्तुत किया, जो समाज की दिशा बदलने में सहायक होंगे:

  1. सामाजिक समरसता: ऊंच-नीच और जातिगत भेदभाव का अंत।
  2. कुटुंब प्रबोधन: परिवारों में संस्कारों और भारतीय मूल्यों का पुनरुद्धार।
  3. पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और हरियाली का संकल्प।
  4. ‘स्व’ का बोध: अपनी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास की पहचान।
  5. नागरिक कर्तव्य: देश के प्रति संवैधानिक और नैतिक दायित्वों का पालन।

संतों का आह्वान: ‘गुलामी की मानसिकता का त्याग करें’

​कार्यक्रम में आध्यात्मिक गुरुओं ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए एकता को अपरिहार्य बताया।

  • महामंडलेश्वर रवि गिरी महाराज ने कहा कि हिन्दू समाज की सुरक्षा केवल जाति-पाति के बंधनों को तोड़ने में ही निहित है। धर्म की ध्वजा को तभी ऊंचा रखा जा सकता है जब हम मिलकर आगे बढ़ें।
  • स्वामी विष्णु देवाचार्य ने जोर दिया कि सैकड़ों वर्षों की गुलामी के बाद अब यह हिन्दू समाज के ‘जागरण’ का समय है। उन्होंने संपूर्ण समाज को एक स्वर में संगठित होने का संदेश दिया।

क्षेत्रीय नेतृत्व की गरिमामयी उपस्थिति

​सम्मेलन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संघ के प्रमुख कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इनमें मुख्य रूप से विधायक सुरेश्वर सिंह, जिला कार्यवाह भूपेंद्र, सह जिला संघचालक डॉ. मनोज, बांकेलाल, हरिद्वार प्रसाद, और खंड कार्यवाह टीकाराम सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति और भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

निष्कर्ष: राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक कदम

​औराही का यह सम्मेलन न केवल एक धार्मिक आयोजन था, बल्कि समाज को वैचारिक रूप से मजबूत करने की एक व्यापक पहल के रूप में देखा जा रहा है। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि ‘वैभवशाली भारत’ का सपना तभी साकार होगा जब हिन्दू समाज संगठित और कर्तव्यनिष्ठ होगा।

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Author: haqeeqatnaama

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