दावोस में मैक्रों की ‘हुंकार’: ‘ताकतवर की हुकूमत’ के खिलाफ यूरोप को एकजुट होने का आह्वान, अमेरिका को दी सीधी चेतावनी

दावोस, 20 जनवरी। विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वैश्विक राजनीति के बदलते स्वरूप पर कड़ा प्रहार किया है। मैक्रों ने ‘साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं’ और ‘ताकतवर की हुकूमत’ के बढ़ते रुझान की तीखी आलोचना की, जिसे स्पष्ट रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आक्रामक विदेश नीति पर एक परोक्ष हमले के रूप में देखा जा रहा है।

“नियमों के बिना व्यवस्था” का खतरा

​मैक्रों ने चेतावनी दी कि आज की दुनिया एक खतरनाक मोड़ पर है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी कर “जंगल राज” (Rule of Might) स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा:

“हम ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ नियमों का कोई स्थान नहीं है। सामूहिक शासन का अभाव देशों के बीच सहयोग को खत्म कर उसे बेतहाशा और घातक प्रतिस्पर्धा में बदल रहा है।”

 

यूरोप को ‘अधीन’ बनाने की कोशिश पर कड़ा ऐतराज

​अमेरिकी व्यापारिक मांगों और नए टैरिफ (Tariffs) लगाने की नीति पर निशाना साधते हुए मैक्रों ने इसे “मौलिक रूप से अस्वीकार्य” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नीतियों का एकमात्र उद्देश्य यूरोप की आर्थिक संप्रभुता को कुचलना और उसे वाशिंगटन के अधीन करना है।

‘साम्राज्यवादी सोच’ और यूरोप का ‘ट्रेड बाजूका’

​मैक्रों ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की ओर संकेत करते हुए कहा कि एक बार फिर दुनिया में ‘साम्राज्यवादी सोच’ सिर उठा रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि आज का यूरोप कमजोर नहीं है।

यूरोप की जवाबी रणनीति के दो मुख्य हथियार:

  1. एंटी-कोएर्शन मैकेनिज्म (Trade Bazooka): मैक्रों ने संकेत दिया कि आर्थिक दबाव के खिलाफ यूरोप अपने इस शक्तिशाली व्यापारिक हथियार का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकेगा।
  2. वित्तीय दबाव: यूरोप अमेरिकी कर्ज (US Debt) में अपने निवेश को घटाकर भी वाशिंगटन पर दबाव बनाने की क्षमता रखता है।

निष्कर्ष: संप्रभुता की रक्षा का संकल्प

​मैक्रों का यह बयान दर्शाता है कि आने वाले समय में ट्रांस-अटलांटिक (अमेरिका और यूरोप) संबंधों में भारी तनाव देखने को मिल सकता है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि यूरोप अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

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Author: haqeeqatnaama

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