पूर्वी सिंहभूम | 27 दिसंबर, 2025 महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) के कथित नाम परिवर्तन को लेकर झारखंड की सियासत गरमा गई है। शनिवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने जिला मुख्यालय पर विशाल धरना-प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के विरुद्ध बिगुल फूंक दिया। पार्टी ने इस कदम को ग्रामीण भारत की आजीविका और अस्मिता पर ‘सीधा हमला’ करार दिया है।
विधायक सोमेश सोरेन का कड़ा रुख: “सड़क से सदन तक मचेगा कोहराम”
धरना स्थल पर उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए घाटशिला विधायक सोमेश सोरेन ने केंद्र सरकार को दो टूक चेतावनी दी। उन्होंने कहा:
“मनरेगा महज एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के आत्मसम्मान और सामाजिक सुरक्षा का कवच है। यदि केंद्र सरकार इसके नाम और स्वरूप से छेड़छाड़ करने की अपनी जिद पर अड़ी रही, तो झामुमो एक ऐसा निर्णायक आंदोलन छेड़ेगा जिसकी गूँज दिल्ली तक सुनाई देगी।”
प्रमुख वक्ताओं के तर्क: क्यों हो रहा है विरोध?
- भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व: प्रदेश प्रवक्ता कुणाल साड़ंगी ने कहा कि महात्मा गांधी का नाम इस योजना से जुड़े होने के कारण करोड़ों मजदूरों की भावनाएं इससे जुड़ी हैं। नाम बदलना इसकी मूल पहचान को मिटाने की साजिश है।
- संवैधानिक अधिकारों पर प्रहार: नेताओं ने तर्क दिया कि यह बदलाव मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने की दिशा में पहला कदम हो सकता है।
- आर-पार की लड़ाई: झामुमो नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया, तो पंचायत स्तर से लेकर राष्ट्रीय राजधानी तक उग्र प्रदर्शन किए जाएंगे।
शक्ति प्रदर्शन: पार्टी के दिग्गज रहे मौजूद
इस विरोध प्रदर्शन में झामुमो ने अपनी संगठनात्मक शक्ति का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित नेता उपस्थित रहे:
- सुमन महतो (पूर्व सांसद)
- कुणाल साड़ंगी (प्रदेश प्रवक्ता)
- मोहन कर्मकार, प्रमोद लाल
- राजू गिरी, सुनील महतो, सागेन पूर्ति
- बागराई मार्डी (नगर संयोजक), नीता सरकार
आंदोलन की रणनीति
प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे गाँव-गाँव जाकर लोगों को केंद्र की इस ‘गरीब विरोधी’ नीति के प्रति जागरूक करेंगे। झामुमो का मानना है कि इस योजना का नाम बदलने का प्रयास इसके महत्व को कम करने की एक सोची-समझी रणनीति है, जिसका कड़ा विरोध किया जाएगा।