रांची | 27 दिसंबर, 2025 राजधानी के चिरौंदी स्थित वृंदावन कॉलोनी में शनिवार को अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम का स्थापना दिवस अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सेवा और समर्पण के 73 गौरवशाली वर्षों को याद करते हुए वक्ताओं ने संगठन के संस्थापक वनयोगी बालासाहब देशपांडे के पदचिह्नों पर चलने का संकल्प दोहराया।
प्रमुख गौरव गाथा: एक नज़र में
- स्थापना: 26 दिसंबर, 1952 (जशपुर, छत्तीसगढ़)।
- संस्थापक: वनयोगी बालासाहब देशपांडे (जिनका जन्मदिन भी इसी तिथि को पड़ता है)।
- वर्तमान विस्तार: देश भर में 22,101 सेवा प्रकल्प।
- सक्रियता: 17,097 विभिन्न स्थानों पर निरंतर कार्य।
मुख्य अतिथि का संबोधन: “राष्ट्रव्यापी सेवा का वटवृक्ष”
राष्ट्रीय सह श्रद्धा जागरण प्रमुख महरंग उरांव ने मुख्य अतिथि के रूप में बालासाहब देशपांडे को नमन करते हुए कहा कि एक छोटे से छात्रावास से शुरू हुआ यह सफर आज एक विशाल राष्ट्रीय अभियान बन चुका है। 1978 में इस संगठन ने अखिल भारतीय स्वरूप लिया और आज यह देश के कोने-कोने में जनजातीय समाज के विकास का आधार स्तंभ है।
वैचारिक विमर्श: धर्म और संस्कृति का संरक्षण
क्षेत्रीय नगरीय प्रमुख हीरेंद्र सिन्हा ने स्थापना के 73 वर्षों की समीक्षा करते हुए इसे जनजागरण का महायज्ञ बताया। वहीं, शिक्षा प्रकल्प की अध्यक्ष तनुजा मुंडा ने एक गंभीर विषय की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा:
“1952 की प्रतिकूल परिस्थितियां आज भी पूरी तरह नहीं बदली हैं। आज भी कुछ देशविरोधी तत्व सेवा के छलावे में जनजातीय संस्कृति को नष्ट करने और धर्मांतरण की कोशिश कर रहे हैं। बालासाहब के विचारों को अपनाकर ही इन खतरों से निपटा जा सकता है।”
गरमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम का कुशल संचालन विभाग संगठन मंत्री दीनबंधु सिंह ने किया। इस अवसर पर समाज के कई प्रबुद्ध वर्ग और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
- हिंदुआ उरांव, पूनम गुप्ता, कुसिया मुंडा, चंदेश्वर मुंडा
- डॉ. राजेश कुमार, सुनील कुमार सिंह
निष्कर्ष: यह स्थापना दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि जनजातीय समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और उनके सर्वांगीण विकास के प्रति संगठन की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब था।