​’सरवंशदानी’ को नमन: गुरुद्वारा नानक दरबार में गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश उत्सव श्रद्धापूर्वक संपन्न

पश्चिमी सिंहभूम | 27 दिसंबर, 2025 सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश उत्सव शनिवार को गुरुद्वारा नानक दरबार में अपार श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। तीन दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान का समापन अखंड पाठ की समाप्ति और भव्य कीर्तन दरबार के साथ हुआ।प्रमुख धार्मिक पड़ाव

  • अखंड पाठ: गुरुवार से शुरू हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पाठ का शनिवार को विधिवत समापन हुआ।
  • विशेष कीर्तन: जमशेदपुर से आए रागी जत्थे (हरमीत सिंह जी) ने मधुर गुरुबाणी कीर्तन से संगत को निहाल किया।
  • अरदास एवं लंगर: ग्रंथी प्रताप सिंह जी द्वारा अरदास के पश्चात गुरु का अटूट लंगर वितरित किया गया।

इतिहास और बलिदान का स्मरण

​श्री गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष गुरमुख सिंह खोखर ने संगत को संबोधित करते हुए गुरु साहिब के महान जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:

“गुरु गोबिंद सिंह जी केवल एक आध्यात्मिक गुरु नहीं, बल्कि मानवता और धर्म के सबसे बड़े रक्षक थे। उन्होंने धर्म की रक्षा हेतु अपने पिता श्री गुरु तेग बहादुर जी और चारों साहिबजादों सहित अपना पूरा परिवार न्योछावर कर दिया, इसीलिए उन्हें ‘सरवंशदानी’ कहा जाता है।”

 

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण

  1. बाल संगत की प्रस्तुति: नन्हे बच्चों ने कविता पाठ के माध्यम से गुरु साहिब के शौर्य और बलिदान की गाथा सुनाई, जिसने उपस्थित संगत को भावविभोर कर दिया।
  2. भक्तिमय वातावरण: कीर्तनी जत्थे की मधुर ध्वनियों और ‘वाहेगुरु’ के सिमरन से पूरा गुरुद्वारा परिसर भक्ति के रंग में सराबोर रहा।
  3. सामूहिक सेवा: श्री गुरु सिंह सभा, स्त्री सत्संग सभा और युवा खालसा के सदस्यों ने लंगर और व्यवस्था में सेवा कर ‘सिख धर्म’ की सेवा भावना का परिचय दिया।

विरासत को नमन

​समारोह के दौरान गुरुद्वारा प्रबंधन ने पटना साहिब (तख्त श्री हरिमंदिर साहिब) और दिल्ली के चांदनी चौक के ऐतिहासिक महत्व को याद करते हुए बताया कि कैसे सिखों का इतिहास सर्वोच्च बलिदानों से लिखा गया है।

निष्कर्ष: यह प्रकाश उत्सव न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि इसने नई पीढ़ी को गुरु साहिब के सिद्धांतों—सत्य, न्याय और निस्वार्थ सेवा—से जुड़ने का संदेश दिया।

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Author: haqeeqatnaama

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