रांची | 28 दिसंबर, 2025
राजधानी रांची का जिला स्कूल मैदान इन दिनों ज्ञान और साहित्य की खुशबू से महक रहा है। ‘समय इंडिया, नई दिल्ली’ के तत्वावधान में आयोजित 10 दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेला के तीसरे दिन रविवार को पुस्तक प्रेमियों का हुजूम उमड़ पड़ा। छुट्टी का दिन होने के कारण बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई किताबों के इस महापर्व का हिस्सा बनने पहुंचा।
छुट्टी का दिन और किताबों का साथ
मेला परिसर में सुबह से ही गहमा-गहमी का माहौल रहा। साहित्य अनुरागियों ने न केवल स्टॉल्स पर घूम-घूमकर अपनी पसंदीदा विधाओं की पुस्तकें खोजीं, बल्कि कई पाठकों ने दुर्लभ संस्करणों की खरीदारी भी की। मेले की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दोपहर होते-होते स्टॉल्स पर पाठकों की लंबी कतारें नजर आने लगीं।
मेला डायरी: यह पुस्तक मेला 4 जनवरी तक चलेगा। पाठकों के लिए प्रवेश का समय सुबह 11:00 बजे से शाम 7:30 बजे तक निर्धारित है।
नन्हे कलाकारों ने रंगों से उकेरी कल्पना
मेले के सांस्कृतिक मंच पर रविवार को बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। तीन अलग-अलग आयु वर्गों में आयोजित इस स्पर्धा में बच्चों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
- विषय: प्रकृति, पर्यावरण और सामाजिक सरोकार।
- झलक: बच्चों की कूचियों ने जहां एक ओर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर प्रकृति के मनोरम दृश्यों को कैनवस पर उतारा।
कल का आकर्षण: सोमवार दोपहर 3 बजे से ‘कविता सुनाओ’ और ‘कहानी लेखन’ प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें प्रतिभागियों के लिए प्रवेश निःशुल्क रखा गया है।
क्या खरीदें? स्टॉल्स पर उपलब्ध खास खजाना
मेले में विभिन्न प्रकाशकों द्वारा हर आयु वर्ग के लिए ज्ञानवर्धक और मनोरंजक सामग्री उपलब्ध कराई गई है:
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श्रेणी |
प्रमुख पुस्तकें / विषय |
प्रकाशक |
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बाल साहित्य |
जातक कहानियां, चाणक्य, सुभाष चंद्र बोस, जादुई नगरी, पंचतंत्र |
राजपाल एंड संस, सस्ता साहित्य मंडल |
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क्लासिक और चर्चित |
गोदान, गबन, निर्मला, कबीर के दोहे, तितली |
समय प्रकाशन, यश प्रकाशन |
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प्रेरक (Self-Help) |
अपनी शक्ति पहचानें, यू कैन डू इट, बुलंदियों की ओर |
क्राउन पब्लिकेशन |
झारखंड की माटी और अस्मिता की गूंज
झारखंड के पाठकों के लिए ‘प्रकाशन संस्थान’ का स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहाँ राज्य के इतिहास और संस्कृति को समझने के लिए महत्वपूर्ण पुस्तकें उपलब्ध हैं:
- हरिवंश: ‘झारखंड: संपन्न धरती, उदास बसंत’
- डॉ. रामदयाल मुंडा: ‘आदिवासी अस्तित्व और झारखंडी अस्मिता के सवाल’
- महादेव टोप्पो: ‘झारखंड में विद्रोह का इतिहास’
यह मेला न केवल किताबों की बिक्री का केंद्र है, बल्कि यह रांची के सांस्कृतिक और बौद्धिक वातावरण को भी समृद्ध कर रहा है।