मेहरमा (गोड्डा): झारखंड के गोड्डा जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां मेहरमा प्रखंड के लकड़मारा गांव में तालाब में डूबने से एक 60 वर्षीय बुजुर्ग श्रमिक की जान चली गई। मृतक की पहचान सिरबिंदु रिख्यासन के रूप में हुई है। इस घटना के बाद से गांव में मातम पसरा है, वहीं ग्रामीणों में तालाब निर्माण की खामियों को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
कैसे हुआ हादसा?
मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह सिरबिंदु रिख्यासन लकड़मारा स्थित सिमरा तालाब पर अपने गेहूं के खेत की सिंचाई करने गए थे। वे तालाब के किनारे पंपिंग सेट लगाकर पानी निकाल रहे थे, तभी अचानक उनका पैर फिसल गया और वे सीधे गहरे पानी में जा गिरे।
बताया जा रहा है कि तालाब का ढाल (Slope) काफी सीधा था, जिसके कारण वे लाख कोशिशों के बाद भी बाहर नहीं निकल सके और गहरे पानी में समा गए। सुबह जब अन्य ग्रामीण वहां पहुंचे, तो शव को पानी में तैरता देख हड़कंप मच गया।
ग्रामीणों का आरोप: ‘मौत का कुआं’ बना तालाब
घटना स्थल पर जुटी भीड़ ने तालाब निर्माण में भारी अनियमितता के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि:
- तालाब की खुदाई नियमों को ताक पर रखकर की गई है।
- नियमों के अनुसार किनारों पर स्टेप्स (सीढ़ियां) होनी चाहिए, जो इस तालाब में नहीं हैं।
- तालाब की गहराई और सीधा ढाल होने के कारण कोई भी व्यक्ति एक बार गिरने के बाद खुद से बाहर नहीं निकल सकता।
प्रशासन की कार्रवाई और सहायता का आश्वासन
सूचना मिलते ही बलबड्डा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की सहायता से शव को बाहर निकाला। हालांकि, परिजनों की असहमति के कारण शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बीडीओ (BDO) अभिनव कुमार ने स्पष्ट किया कि:
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- आपदा मुआवजा: पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर प्राकृतिक आपदा के तहत मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपये देने का प्रावधान है।
- तात्कालिक सहायता: फिलहाल परिवार के लिए ‘पारिवारिक लाभ योजना’ की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
- विशेष पहल: मृतक की पुत्री, जो कि दृष्टिबाधित (दृष्टिविहीन) हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर ‘अबुआ आवास’ देने का आश्वासन दिया गया है।
संपादकीय टिप्पणी: यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़ा करती है। यदि तालाब में सुरक्षा स्टेप्स होते, तो शायद एक बुजुर्ग की जान बचाई जा सकती थी।