रामगढ़, 13 जनवरी: झारखंड के रामगढ़ जिले से एक विचलित करने वाली खबर सामने आई है। गोला प्रखंड के चोपादारू गांव में मंगलवार की सुबह एक विशालकाय हाथी का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। गजराज की इस रहस्यमयी मौत ने न केवल ग्रामीणों को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि वन विभाग के गलियारों में भी हड़कंप मचा दिया है।
क्या यह प्राकृतिक मौत है या हत्या?
हाथी की मौत सामान्य है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश, यह फिलहाल एक बड़ा अनसुलझा सवाल बना हुआ है। रिहायशी इलाके के इतने करीब हाथी का शव मिलना कई तरह के संदेह पैदा कर रहा है। घटनास्थल पर चारों ओर बिखरा हुआ खून इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि हाथी ने दम तोड़ने से पहले काफी संघर्ष किया होगा।
वन विभाग की कार्रवाई और संदेह
घटना की सूचना मिलते ही डीएफओ (DFO) नीतीश कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे। अधिकारियों के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला विषाक्त पदार्थ (जहर) खिलाए जाने का लग रहा है।
”अचानक हाथी की मौत के पीछे कोई बड़ा राज हो सकता है। जिस स्थान पर शव मिला है, वहीं पर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी ताकि मौत के असली कारणों का पता चल सके।”
— नीतीश कुमार, डीएफओ
जांच के मुख्य बिंदु:
- खून के निशान: हाथी के शरीर और आसपास मिले खून के धब्बे किसी आंतरिक चोट या गंभीर जहर के असर की ओर संकेत कर रहे हैं।
- पोस्टमार्टम: विभाग ने तय किया है कि मौके पर ही डॉक्टरों की टीम पोस्टमार्टम करेगी, जिसके बाद ही हाथी का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
- ग्रामीणों से पूछताछ: वन विभाग यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या हाल के दिनों में हाथी का ग्रामीणों के साथ कोई संघर्ष हुआ था।
निष्कर्ष:
हाथी को ‘विरासत पशु’ का दर्जा प्राप्त है, ऐसे में उसकी इस तरह मौत होना पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के लिए एक बड़ी क्षति है। क्या यह फसल बचाने के लिए किसी की उग्र कोशिश थी या कोई शिकारी गिरोह इसके पीछे है? इन सभी सवालों के जवाब अब पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएंगे।