जम्मू, 20 जनवरी। जम्मू-कश्मीर विधानसभा के आगामी बजट सत्र की आहट के साथ ही प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को प्रमुख विभागों के साथ बजट-पूर्व (Pre-Budget) परामर्श प्रक्रिया की शुरुआत की। 2 फरवरी से शुरू होने वाले सत्र के बीच, मुख्यमंत्री 6 फरवरी को केंद्र शासित प्रदेश का वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे।
विभागीय प्राथमिकताओं और विकास पर जोर
वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने समीक्षा बैठकों के दौरान स्पष्ट किया कि आगामी बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदों का प्रतिबिंब होना चाहिए।
मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश:
- समावेशी विकास: प्रस्तावों को केंद्र शासित प्रदेश के समग्र विकास लक्ष्यों के साथ संरेखित (Align) किया जाए।
- कुशल सेवा वितरण: सरकारी सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित करने के लिए संसाधनों का आवंटन हो।
- संतुलित विकास: सभी क्षेत्रों में विकास की गति समान रखने पर विशेष बल दिया गया।
इन प्रमुख विभागों के साथ हुआ मंथन
बैठक के पहले दिन उन विभागों पर चर्चा हुई जो बुनियादी ढांचे और नागरिक सेवाओं के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं:
- विद्युत विकास (Power Development)
- आवास एवं शहरी विकास (Housing & Urban Development)
- राजस्व, पर्यटन और सूचना प्रौद्योगिकी (IT)
- वित्त, विधि एवं संसदीय कार्य
बैठक में मौजूद उच्च स्तरीय टीम
परामर्श प्रक्रिया में जम्मू-कश्मीर प्रशासन के शीर्ष अधिकारी शामिल रहे, जिनमें मुख्य सचिव अटल दुल्लू, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरज गुप्ता, और वित्त विभाग के प्रधान सचिव संतोष डी. वैद्य प्रमुख थे। इसके अलावा पर्यटन, राजस्व और बिजली विभागों के प्रशासनिक सचिवों ने भी अपने प्रस्तुतीकरण दिए।
आगे का कार्यक्रम
आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, परामर्श का यह दौर अभी थमा नहीं है:
- 21 और 22 जनवरी: शेष 15 महत्वपूर्ण विभागों के साथ बजट चर्चा जारी रहेगी।
- 6 फरवरी: मुख्यमंत्री विधानसभा में अपना दूसरा बजट पेश करेंगे।
विशेषज्ञों की दृष्टि में
माना जा रहा है कि यह बजट उमर अब्दुल्ला सरकार के लिए अपनी चुनावी प्राथमिकताओं को जमीन पर उतारने का सबसे बड़ा अवसर होगा, विशेषकर बिजली सुधार और पर्यटन के क्षेत्र में।