अरावली संरक्षण: कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य का 243 वर्ग किमी क्षेत्र ‘इको-सेंसिटिव जोन’ घोषित

नई दिल्ली, 20 जनवरी। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राजस्थान की अरावली श्रृंखला में स्थित कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने अभयारण्य के चारों ओर 0 से 1 किलोमीटर तक के क्षेत्र को इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) घोषित कर दिया है।

तीन जिलों के 94 गांव होंगे कवर

​अधिसूचना के अनुसार, यह संवेदनशील क्षेत्र उदयपुर, राजसमंद और पाली जिलों में फैला हुआ है। कुल 243.47 वर्ग किमी क्षेत्र को इस दायरे में लाया गया है। इस घोषणा का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों के आवास और मानवीय गतिविधियों के बीच एक ‘बफर’ (सुरक्षा घेरा) तैयार करना है।

सख्त पाबंदियां और विनियमित गतिविधियां

​इको-सेंसिटिव जोन घोषित होने के बाद अब इस क्षेत्र में निम्नलिखित गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण रहेगा:

  • पूर्ण प्रतिबंध: खनन (Mining), प्रदूषण फैलाने वाले भारी उद्योग, पत्थर काटने वाली इकाइयां और नए बड़े होटल या रिसॉर्ट के निर्माण पर रोक।
  • विनियमित गतिविधियां: मौजूदा होटलों का विस्तार और छोटी निर्माण गतिविधियां केवल विशेषज्ञों की समिति की अनुमति से ही हो सकेंगी।

समृद्ध जैव विविधता का संरक्षण

​केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि यह क्षेत्र कई दुर्लभ वन्यजीवों का घर है। ईएसजेड (ESZ) घोषित होने से इनके प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहेंगे।

  • प्रमुख वन्यजीव: तेंदुआ, भारतीय भेड़िया, धारीदार लकड़बग्घा, जंगली बिल्ली, पैंगोलिन, नीलगाय और चिंकारा।
  • दुर्लभ पक्षी: यह क्षेत्र ‘पेंटेड फ्रैंकोलिन’ जैसी दुर्लभ पक्षी प्रजातियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

स्थानीय समुदायों का विकास

​मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह कदम न केवल वन्यजीवों के लिए है, बल्कि स्थानीय स्वदेशी समुदायों के उत्थान के लिए भी है।

  1. पर्यावरण अनुकूल पहल: जैविक खेती और कृषि वानिकी (Agro-forestry) को बढ़ावा दिया जाएगा।
  2. कौशल विकास: स्थानीय युवाओं को स्थायी भविष्य के लिए नई तकनीकों और संरक्षण आधारित रोजगार का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  3. स्थायी भविष्य: यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘समुदाय-संचालित संरक्षण’ (Community-driven conservation) के विजन पर आधारित है।

विशेषज्ञों की राय

​पर्यावरणविदों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे अरावली की पहाड़ियों को अवैध खनन से बचाने के लिए एक आवश्यक ‘सुरक्षा कवच’ बताया है। इससे क्षेत्र का भू-जल स्तर सुधरने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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Author: haqeeqatnaama

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