महोबा, 20 जनवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में ‘गांव-गांव संघ’ अभियान के तहत जनपद के खन्ना थाना क्षेत्र स्थित ग्योडी गांव में एक विराट हिन्दू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में हजारों की संख्या में उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता और प्रांत प्रचारक श्रीराम ने हिन्दू समाज की एकजुटता को राष्ट्र की उन्नति का आधार बताया।
विजयादशमी और शताब्दी यात्रा का संकल्प
प्रांत प्रचारक ने कहा कि संघ के सौ वर्षों की यात्रा पूर्ण होने के अवसर पर यह कार्यक्रम समाज को जागृत करने के लिए किए जा रहे हैं। उन्होंने भारत को ‘मां’ की संज्ञा देते हुए कहा कि विश्व कल्याण की कामना केवल भारतीय संस्कृति में ही निहित है।
संबोधन के मुख्य बिंदु:
- बंटवारे का दंश और पुनरुत्थान: “विगत कालखंड में कुछ रूढ़ियों के कारण समाज में बिखराव आया था, लेकिन स्वामी विवेकानंद के ‘एक हिंदू’ के आह्वान ने हमें फिर से संगठित किया। आज हम पराजय नहीं, विजय का उत्सव मना रहे हैं।”
- राम मंदिर और रामसेतु: “अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण और रामसेतु की सुरक्षा हिन्दू एकता की ही शक्ति का परिणाम है। जब समाज एक होता है, तो व्यवस्थाओं और अदालतों को भी जनभावना का सम्मान करना पड़ता है।”
- वैश्विक सम्मान: प्रधानमंत्री के विदेशी दौरों और वहां मिलने वाले सम्मान को उन्होंने प्रत्येक भारतीय की एकता का सम्मान बताया।
जाति-पाति के बंधनों को तोड़ने का आह्वान
सम्मेलन का समापन एक सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। प्रांत प्रचारक ने “जाति-पाति की करो विदाई, हम सब हिन्दू भाई-भाई” के नारे पर जोर देते हुए कहा कि हिन्दू समाज के सशक्त और दूरदर्शी बनने से ही भारत पुनः ‘वैभवशाली’ राष्ट्र बनेगा।
विशिष्ट जनों की उपस्थिति
इस अवसर पर आध्यात्मिक और राजनीतिक जगत की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं:
- आध्यात्मिक नेतृत्व: साध्वी सर्वसिद्धा गिरी और पुरुषोत्तम महाराज।
- संघ पदाधिकारी: जिला प्रचारक सौरभ, जिला कार्यवाह प्रमोद, और जिला शारीरिक शिक्षण प्रमुख रोहित राज।
- राजनीतिक एवं सामाजिक नेतृत्व: पूर्व मंत्री सिद्धगोपाल साहू, भाजपा नेता सुलभ सक्सेना, ब्लॉक प्रमुख राजू सिंह और पूर्व चेयरमैन शिवपाल तिवारी।
एक नज़र में: विराट हिन्दू सम्मेलन
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प्रमुख बिंदु |
विवरण |
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स्थान |
ग्योडी गांव, जनपद महोबा |
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आयोजन का आधार |
संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने का अवसर |
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प्रमुख संदेश |
सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता |
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जनभागीदारी |
हजारों की संख्या में ग्रामीण और शहरी श्रद्धालु |