रांची, 21 जनवरी: झारखंड की प्राचीन और समृद्ध ‘मेगालिथिक’ (महापाषाण) विरासत को अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विजन को आगे बढ़ाते हुए, कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने यूनाइटेड किंगडम (यूके) का दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य झारखंड के पाषाण स्मारकों के वैज्ञानिक संरक्षण और इन्हें यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर की सूची में शामिल कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ रणनीतिक विमर्श करना रहा।
वैज्ञानिक संरक्षण और वैश्विक मानकों पर जोर
बुधवार को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मंत्री सुदिव्य कुमार ने यूके के प्रमुख संस्थानों और विरासत विशेषज्ञों के साथ कई दौर की बैठकें कीं। इन बैठकों में निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर सहमति बनी:
- वैज्ञानिक दस्तावेज़ीकरण: राज्य के मेगालिथ स्थलों का आधुनिक तकनीकों के माध्यम से डेटा तैयार करना।
- जोखिम आकलन: प्राकृतिक और मानवीय कारकों से विरासत को होने वाले खतरों की पहचान और उनका समाधान।
- लैंडस्केप प्रबंधन: स्मारकों के आसपास के वातावरण को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करना।
आदिवासी संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता
विमर्श के दौरान यह बात प्रमुखता से उभरी कि झारखंड के ये ‘मोनोलिथ’ केवल पत्थर की संरचनाएं नहीं हैं, बल्कि ये राज्य के आदिवासी समुदायों की जीवंत परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि संरक्षण की किसी भी योजना में स्थानीय समुदायों की भागीदारी अनिवार्य होनी चाहिए ताकि सांस्कृतिक संवेदनशीलता बनी रहे।
यूनेस्को नामांकन के लिए बनेगा ‘ठोस डोज़ियर’
झारखंड की इस अनमोल धरोहर को यूनेस्को की सूची में जगह दिलाने के लिए एक तथ्यपरक डोज़ियर (Dossier) तैयार करने पर चर्चा हुई। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने मानचित्रण, ऐतिहासिक प्रमाणों और प्रबंधन ढांचे को वैश्विक मानदंडों के अनुसार प्रस्तुत करने की तकनीक साझा की।
सरकार की प्रतिबद्धता: विरासत भी, विकास भी
बैठकों के बाद मंत्री सुदिव्य कुमार ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा:
”मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में हमारी सरकार राज्य की इस अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। यह विरासत केवल हमारा अतीत नहीं, बल्कि हमारी भावी पीढ़ियों की पहचान है। हम अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से इसे दुनिया के सामने लाने का काम करेंगे।”
अगला कदम:
राज्य सरकार अब इन विशेषज्ञ सुझावों के आधार पर एक व्यापक रोडमैप तैयार करेगी, जिसके तहत न केवल इन स्थलों का संरक्षण होगा, बल्कि इन्हें पर्यटन के दृष्टिकोण से भी विकसित किया जाएगा।