रांची, 21 जनवरी: झारखंड राज्य समाज कल्याण आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ ने राज्य सरकार की नीतियों और मुख्यमंत्री के दावों पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। संघ के संयोजक जय प्रकाश (जेपी) पांडेय ने बुधवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट किया कि जब तक जमीनी स्तर पर काम करने वाली आंगनवाड़ी सेविका और सहायिकाओं को उनका वाजिब हक नहीं मिलता, तब तक राज्य के विकास की बातें बेमानी हैं।
मुख्यमंत्री के ‘2050 विजन’ पर सवाल
हाल ही में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा झारखंड को वर्ष 2050 तक समृद्ध बनाने के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जेपी पांडेय ने कहा कि राज्य की नींव तभी मजबूत होगी जब मानव संसाधन (Human Resource) सुरक्षित होगा। उन्होंने कहा कि कुपोषण मुक्त झारखंड का सपना देखने वाली सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि इस लड़ाई में सबसे अगली पंक्ति में खड़ी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता स्वयं आर्थिक संकट से जूझ रही हैं।
आंगनवाड़ी केंद्रों की बदहाली और बकाया भुगतान
संघ ने राज्य के आंगनवाड़ी केंद्रों की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए:
- पोषाहार की कमी: कई केंद्रों में पिछले कई महीनों से राशन और पोषाहार की आपूर्ति ठप है, जिससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाला पोषण प्रभावित हो रहा है।
- लंबित मानदेय: सेविकाओं और सहायिकाओं का मानदेय, भत्ता और अन्य बकाया राशि लंबे समय से लंबित है, जिससे उनके घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है।
- अनियमित भुगतान: समय पर भुगतान न होने के कारण कर्मियों में भारी रोष है।
संघ की मुख्य मांगें
जेपी पांडेय ने सरकार के सामने एक स्पष्ट मांग पत्र रखते हुए तत्काल कार्रवाई की चेतावनी दी है:
-
- राज्यकर्मी का दर्जा: आंगनवाड़ी सेविका-सहायिकाओं को अविलंब राज्यकर्मी घोषित किया जाए।
- सम्मानजनक पेंशन: सेवानिवृत्ति के बाद कर्मियों के लिए पेंशन और अन्य लाभ सुनिश्चित हों।
- बकाया राशि का भुगतान: सभी लंबित भत्तों और मानदेय का तुरंत भुगतान किया जाए।
जेपी पांडेय का बयान: > “मजबूत मानव संसाधन के बिना किसी भी राज्य का सतत विकास संभव नहीं है। यदि सरकार वास्तव में कुपोषण मुक्त और विकसित झारखंड बनाना चाहती है, तो उसे आंगनवाड़ी कर्मियों को सम्मानजनक जीवन देना ही होगा।”