रांची, 21 जनवरी: झारखंड के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना’ के तहत गंभीर रोगों से जूझ रहे 18 मरीजों के इलाज के लिए वित्तीय सहायता को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय बुधवार को झारखंड स्टेट आरोग्य सोसायटी (जसास) की राज्य स्तरीय समिति की बैठक में लिया गया।
बैठक का मुख्य बिंदु: 5 लाख से 20 लाख तक की मदद
बैठक की अध्यक्षता कर रहे जसास के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने बताया कि समिति ने कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट और ब्लड कैंसर जैसी घातक बीमारियों से पीड़ित मरीजों के आवेदनों की समीक्षा की। इस दौरान एक विशेष मामले में, जहां इलाज का खर्च 16 लाख रुपये आंका गया है, उसे कैबिनेट (मंत्रिपरिषद) की मंजूरी के लिए भेजने का निर्णय लिया गया है।
किसे मिलेगा लाभ? लाभार्थियों का विवरण
स्वीकृत सूची में शामिल मरीजों को उनके रोग के अनुसार विभिन्न अस्पतालों में विशेषज्ञ उपचार मिलेगा:
- कैंसर रोगी (14 मरीज): सरिता देवी, शाहिना परवीन, परेश कुमार शर्मा, लक्ष्मी नाथ साहू, लैलुन खातून, उषा शर्मा, जब्साना कैबर्त्ता, मो. हारून रशीद, अफसाना खातून, मास्टर दिव्यांशु कुमार, अजमुल अंसारी, उर्मिला करुआ, सलमा परवीन और नर्गिस आरा।
- किडनी ट्रांसप्लांट (3 मरीज): मंडीप कुमार, जीतबहन मछवा और आदित्य कुमार।
- रक्त कैंसर (1 मरीज): मिस राजनंदिनी कुमारी।
प्रक्रिया में पारदर्शिता: सिविल सर्जनों को कड़े निर्देश
बैठक के दौरान कुछ आवेदनों में स्पष्टता की कमी पाए जाने पर छवि रंजन ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:
- भौतिक सत्यापन: मरीजों की वर्तमान स्थिति का फिजिकल वेरिफिकेशन या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पुष्टि की जाए।
- लागत का आकलन: अस्पताल द्वारा दिए गए इलाज के खर्च की गहन जांच के बाद ही प्रस्ताव राज्य स्तर पर भेजें।
- स्पष्ट विवरण: मरीज की मेडिकल कंडीशन का पूरा और सटीक ब्यौरा आवेदन के साथ होना अनिवार्य है।
इन अधिकारियों की रही मौजूदगी
उच्चस्तरीय बैठक में स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिनमें स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, अपर कार्यकारी निदेशक सीमा सिंह और जसास के महाप्रबंधक प्रवीण चंद्र मिश्रा प्रमुख थे।
नोट: मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना झारखंड के उन नागरिकों के लिए एक जीवन रक्षक पहल है, जिनके पास महंगे इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।