हजारीबाग में हाथियों का भीषण तांडव: नींद में सो रहे दो मासूमों समेत छह लोगों को कुचला, इलाके में कोहराम

हजारीबाग (झारखंड): झारखंड के हजारीबाग जिले से एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ चुरचू प्रखंड के गोंदवार गांव में गुरुवार देर रात हाथियों के एक झुंड ने भारी उत्पात मचाते हुए छह ग्रामीणों को मौत के घाट उतार दिया। मृतकों में एक साल के मासूम से लेकर 50 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग शामिल हैं। इस भीषण घटना के बाद पूरे इलाके में मातम और आक्रोश का माहौल है।

​रात के सन्नाटे में मौत बनकर आए हाथी

​मिली जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा गुरुवार रात करीब 1:00 से 1:30 बजे के बीच हुआ। चुरचू प्रखंड के अंगो थाना क्षेत्र स्थित गोंदवार गांव में पांच हाथियों का एक झुंड अचानक दाखिल हुआ। जब पूरा गांव गहरी नींद में सोया था, हाथियों ने एक घर के मुख्य गेट को उखाड़ फेंका और सीधे अंदर घुस गए। अंदर सो रहे लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और हाथियों ने उन्हें बुरी तरह कुचल दिया।

​मृतकों की सूची: उजड़ गए हंसते-खेलते परिवार

​इस हमले में एक ही झटके में छह जिंदगियां खत्म हो गई। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है:

  • अनुराग राम (1 वर्ष)
  • संजना कुमारी (3 वर्ष)
  • सविता देवी (25 वर्ष)
  • सुमन कुमारी (26 वर्ष)
  • सूरज राम (50 वर्ष)
  • धनेश्वर राम (52 वर्ष)

​ग्रामीणों में आक्रोश, वन विभाग पर उठे सवाल

​स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों का यह झुंड पिछले एक महीने से इस क्षेत्र में विचरण कर रहा था। हालांकि, वन विभाग द्वारा समय-समय पर अलर्ट जारी किया जा रहा था, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण इतनी बड़ी जनहानि हुई।

​घटना की पुष्टि करते हुए पूर्वी वन प्रमंडल के डीएफओ विकास कुमार उज्ज्वल ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, “यह एक अत्यंत पीड़ादायक घड़ी है। पूरा वन विभाग शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़ा है और नियमानुसार हर संभव सहायता सुनिश्चित की जाएगी।”

​बढ़ता ‘मानव-हाथी संघर्ष’ एक गंभीर चुनौती

​झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict) की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। अभी कुछ दिन पहले ही गोमिया प्रखंड में भी हाथियों के हमले में पांच लोगों की जान गई थी। रामगढ़ और हजारीबाग के सीमावर्ती इलाकों में हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे ग्रामीणों में डर और असुरक्षा की भावना घर कर गई है।

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Author: haqeeqatnaama

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