रांची | 09 फरवरी, 2026
झारखंड उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ पुलिस जांच और किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर लगी रोक को अगले आदेश तक बढ़ा दिया है। सोमवार को न्यायमूर्ति एस.के. द्विवेदी की पीठ ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि फिलहाल अधिकारियों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं होगी।
कानूनी दलीलों का केंद्र: ‘सुनवाई की योग्यता’
सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में कानूनी दिग्गजों का जमावड़ा रहा। राज्य सरकार का पक्ष महाधिवक्ता राजीव रंजन ने रखा, वहीं ईडी की ओर से भारत के सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कमान संभाली। अब सबकी नजरें 17 फरवरी पर टिकी हैं, जब अदालत इस बिंदु पर बहस सुनेगी कि क्या यह याचिका सुनवाई योग्य (Maintainable) है या नहीं।
ईडी दफ्तर की सुरक्षा पर ‘सुप्रीम’ पहरा
पिछली सुनवाई का हवाला देते हुए अदालत ने ईडी कार्यालय की सुरक्षा को लेकर अपनी गंभीरता दोहराई है। कोर्ट ने रांची स्थित ईडी दफ्तर की सुरक्षा का जिम्मा राज्य पुलिस के बजाय केंद्रीय बलों (CISF या BSF) को सौंपने का निर्देश पहले ही दे रखा है। साथ ही, CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया है ताकि साक्ष्यों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ की गुंजाइश न रहे।
क्या है पूरा विवाद? (क्रोनोलॉजी समझिए)
यह पूरा मामला एयरपोर्ट थाना कांड संख्या 05/2026 से जुड़ा है। विवाद की जड़ें कुछ इस प्रकार हैं:
- आरोप: संतोष कुमार नामक व्यक्ति (जिन पर ₹23 करोड़ के पेयजल घोटाले का आरोप है) ने ईडी अधिकारियों पर मारपीट का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई थी।
- ईडी का पक्ष: ईडी का दावा है कि 12 जनवरी 2026 को पूछताछ के दौरान संतोष कुमार खुद उत्तेजित हो गए और स्वयं ही पानी का जग सिर पर मारकर चोटिल हो गए।
- मांग: ईडी ने हाई कोर्ट से इस FIR को रद्द करने या पूरे मामले की जांच CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की गुहार लगाई है।
आगे क्या?
17 फरवरी की सुनवाई यह तय करेगी कि राज्य सरकार की पुलिस को इस मामले में हस्तक्षेप का अधिकार है या मामला केंद्रीय एजेंसी के पाले में जाएगा। यह फैसला न केवल ईडी अधिकारियों के मनोबल बल्कि राज्य और केंद्र की एजेंसियों के बीच चल रहे ‘शीत युद्ध’ पर भी गहरा असर डालेगा।