मानगो चुनाव: बगावत की आग में झुलसती कांग्रेस; जेबा खान के निष्कासन से गहराया ‘अपनों’ का संकट

पूर्वी सिंहभूम | 09 फरवरी, 2026

​मानगो नगर निगम चुनाव की सरगर्मी के बीच कांग्रेस पार्टी इस वक्त विकास के मुद्दों से ज्यादा अपने अंतर्कलह को लेकर चर्चा में है। चुनावी रणभेरी बजने के साथ ही पार्टी के भीतर की दरारें अब गहरी खाइयों में तब्दील होती दिख रही हैं। प्रदेश सचिव और मेयर पद की सशक्त दावेदार जेबा खान को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किए जाने के फैसले ने मानगो की सियासत में भूचाल ला दिया है।

​अनुशासन बनाम जनाधार: क्या है पूरा विवाद?

​कांग्रेस ने इस चुनाव में पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता को अपना आधिकारिक समर्थन देने का ऐलान किया है। पार्टी नेतृत्व का स्पष्ट निर्देश था कि सभी कार्यकर्ता और पदाधिकारी सुधा गुप्ता की जीत सुनिश्चित करें। हालांकि, जेबा खान ने पार्टी के इस फैसले को चुनौती देते हुए चुनावी मैदान से हटने से साफ इनकार कर दिया।

​पार्टी द्वारा नाम वापस लेने के तमाम दबावों को दरकिनार करने के बाद, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें निलंबित कर दिया। जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह ने प्रेस वार्ता में स्पष्ट कहा कि “पार्टी लाइन से ऊपर कोई नहीं है”, लेकिन क्या यह कार्रवाई पार्टी को एकजुट रख पाएगी? यह एक बड़ा सवाल है।

​दो फाड़ में बंटी कांग्रेस

​जेबा खान के निष्कासन ने पार्टी को दो गुटों में विभाजित कर दिया है:

  1. संगठन गुट: जो सुधा गुप्ता और पार्टी के आधिकारिक फैसले के साथ मजबूती से खड़ा है।
  2. समर्थक गुट: जो जेबा खान को एक ‘जनाधार वाली नेता’ मानते हुए उनके निष्कासन का विरोध कर रहा है।

​हैरानी की बात यह है कि कई वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर जेबा के पक्ष में नारेबाजी की, जो यह दर्शाता है कि यह लड़ाई अब केवल एक सीट की नहीं, बल्कि स्थानीय वर्चस्व की बन चुकी है।

​विश्लेषकों की राय: दांव उल्टा पड़ने की आशंका

​राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह निष्कासन कांग्रेस के लिए ‘डैमेज कंट्रोल’ के बजाय ‘सेल्फ गोल’ साबित हो सकता है। चूंकि नगर निकाय चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं लड़े जा रहे हैं, ऐसे में जेबा खान की मौजूदगी कांग्रेस के कैडर वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। विपक्ष इस कलह को कांग्रेस की कमजोरी के रूप में भुनाने के लिए तैयार बैठा है।

​निष्कर्ष

​मानगो का यह चुनाव अब केवल नाली-सड़क और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा नहीं रह गया है। यह कांग्रेस के लिए अनुशासन की परीक्षा और नेतृत्व क्षमता की अग्निपरीक्षा बन गया है। क्या सुधा गुप्ता इस गुटबाजी के बावजूद अपनी नैया पार लगा पाएंगी या जेबा खान की बगावत कांग्रेस का गणित बिगाड़ देगी? इसका फैसला मानगो की जनता जल्द करेगी।

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Author: haqeeqatnaama

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