भारतीय रेल इतिहास के सबसे भीषण हादसों में से एक बागमती रेल दुर्घटना को आज 45 वर्ष पूरे हो गए। 6 जून 1981 को बिहार के खगड़िया जिले में हुई इस दर्दनाक दुर्घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
जानकारी के अनुसार, एक पैसेंजर ट्रेन बागमती नदी पर बने पुल से गुजर रही थी, तभी उसकी कई बोगियां पटरी से उतरकर उफनती नदी में जा गिरीं। हादसा इतना भयावह था कि देखते ही देखते ट्रेन की बोगियां नदी में समा गईं और सैकड़ों यात्री पानी में बह गए।
इस दुर्घटना में करीब 800 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई गई थी। हालांकि आधिकारिक तौर पर 286 शव बरामद किए गए थे, जबकि 300 से अधिक लोग लंबे समय तक लापता रहे। नदी के तेज बहाव और खराब मौसम के कारण राहत एवं बचाव कार्य भी प्रभावित हुआ था।
बागमती रेल हादसा आज भी भारतीय रेलवे के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। इस त्रासदी ने रेल सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद रेलवे ने सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए।
यह हादसा आज भी उन परिवारों की स्मृतियों में जीवित है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को इस दुर्घटना में खो दिया था।