रांची, 12 जून: आम आदमी पार्टी (आप) झारखंड ने रिम्स-2 के लिए चयनित भूमि को लेकर गंभीर आपत्ति जताते हुए सरकार से विवादित जमीन पर निर्माण कार्य रोकने और आदिवासी अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। पार्टी ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि विकास कार्यों के नाम पर आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता।
प्रदेश समन्वय समिति सदस्य लक्ष्मण सिंह ने कहा कि रिम्स-2 के लिए रैयतों की इच्छा के विरुद्ध भूमि अधिग्रहण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जबरन भूमि अधिग्रहण करती है तो वर्तमान सरकार और पूर्ववर्ती सरकारों में कोई अंतर नहीं रह जाएगा। उन्होंने दावा किया कि संबंधित भूमि रैयती एवं खातियानी (आदिवासी परंपरागत) भूमि है, जिस पर किसी भी प्रकार का सरकारी या निजी निर्माण आदिवासी अधिकारों का उल्लंघन होगा।
रांची ग्रामीण जिला अध्यक्ष शनि उरांव ने कहा कि भूमि चयन की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही तथा स्थानीय निवासियों की सहमति के बिना निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) एवं संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT Act) आदिवासी भूमि की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। ऐसे में यदि यह भूमि आदिवासी स्वामित्व की है, तो उस पर रिम्स-2 का निर्माण कानून की भावना के विपरीत होगा।
पार्टी के जोन प्रभारी राजेश लिंडा ने कहा कि आम आदमी पार्टी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की पक्षधर है, लेकिन विकास के नाम पर आदिवासी समाज की जमीन छीनना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे विकास भी हो और स्थानीय समुदाय के अधिकार भी सुरक्षित रहें।
प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी ने सरकार के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें रिम्स-2 के लिए चयनित भूमि की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच, विवाद के समाधान तक निर्माण कार्य पर रोक, आदिवासी समुदाय की सहमति एवं संवैधानिक प्रावधानों का पालन तथा आवश्यकता पड़ने पर बंजर या गैर-मजरूआ सरकारी भूमि का चयन शामिल है।
आम आदमी पार्टी ने झारखंड सरकार से इस संवेदनशील मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर न्यायपूर्ण समाधान निकालने की अपील की। साथ ही सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और नागरिकों से आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आगे आने का आह्वान किया।