रांची: राजधानी रांची के बाजरा कुम्बा टोली में जमीन विवाद को लेकर गुरुवार को ग्राम सभा की बैठक आयोजित की गई। बैठक में एक परिवार की बेटी को घर से बेदखल किए जाने और घर तक जाने का रास्ता बंद किए जाने का मामला प्रमुखता से उठाया गया।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1992 में अर्जुन उरांव ने अपनी पत्नी के साथ उक्त जमीन एग्रीमेंट के आधार पर लेकर उस पर मकान बनाया था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे जमीन की रजिस्ट्री नहीं करा सके। कुछ समय बाद अर्जुन उरांव और उनकी पत्नी अपने चारों बच्चों को छोड़कर चले गए। परिवार की चार बेटियों में से तीन की शादी हो चुकी है, जिनमें एक बेटी का विवाह करीब दो महीने पहले हुआ था। विवाह का मंडप भी उसी घर में लगाया गया था। चौथी बेटी अविवाहित है और उसी घर में रहकर पढ़ाई कर रही थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि परिवार की कमजोर स्थिति का फायदा उठाते हुए रामजू तिग्गा नामक व्यक्ति ने जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करा ली। इसके बाद उन्होंने जमीन के चारों ओर बाउंड्री वॉल बनवा दी और घर तक आने-जाने का रास्ता बंद कर दिया। आरोप है कि इसके कारण घर में रह रही युवती को भी बेदखल होना पड़ा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राम सभा की बैठक बुलाई गई, जिसमें रामजू तिग्गा को भी बुलाया गया। ग्रामीणों के अनुसार बैठक में उन्होंने कहा कि उन्होंने जमीन खरीदकर रजिस्ट्री करा ली है और “जिसको जो करना है कर ले।”
दोनों पक्षों की बातें सुनने के बाद ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि घर में रहने वाली युवती के आवागमन का रास्ता तत्काल सुनिश्चित किया जाए। ग्राम सभा के निर्णय के अनुसार घर में प्रवेश के लिए एक दरवाजा लगाने का फैसला लिया गया। वहीं ग्रामीणों ने पहल करते हुए घर के पीछे की ओर से रास्ता खोलकर एक वैकल्पिक प्रवेश द्वार भी उपलब्ध कराया, ताकि युवती को अपने घर आने-जाने में परेशानी न हो।
ग्रामीणों ने कहा कि जमीन के स्वामित्व का अंतिम फैसला सक्षम न्यायालय या संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत होगा, लेकिन तब तक किसी व्यक्ति को रहने के अधिकार और आवागमन से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। ग्राम सभा ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करने की भी मांग की।