हाईकोर्ट की रोक से 11वीं से 13वीं JPSC के चयनित अभ्यर्थियों को राहत

नियुक्तियां रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर अगले आदेश तक रोक, सरकार और JPSC से मांगा जवाब

रांची। झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा तथा फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियां रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने मामले में राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जवाब मांगा है।

अदालत में नियुक्तियां रद्द किए जाने के खिलाफ तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और पीएएस पति ने पक्ष रखा।

342 चयनित अभ्यर्थियों का मामला

11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा, विज्ञापन संख्या 1/2024 के तहत 342 पदों पर अभ्यर्थियों का चयन हुआ था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया गया और वे प्रशिक्षण एवं सेवा प्रक्रिया में शामिल हो चुके थे। सरकार की ओर से 18 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना के बाद इन नियुक्तियों पर संकट खड़ा हो गया था। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से फिलहाल चयनित अभ्यर्थियों को राहत मिली है।

दूसरी नौकरी छोड़कर आईं सोनम कुमारी

याचिकाकर्ता सोनम कुमारी ने अदालत को बताया कि उन्होंने दूसरी जगह की नौकरी छोड़कर झारखंड में नियुक्ति स्वीकार की थी। उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला और उन्होंने प्रशिक्षण भी पूरा किया। इसके बाद 18 अगस्त 2026 की सरकारी अधिसूचना से उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई। याचिका में नियुक्ति रद्द करने के आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने और सेवा में शामिल होने के बाद अचानक नियुक्ति रद्द किए जाने से उनके करियर और भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।

फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्ति पर भी रोक

तीसरी याचिका सौरव सिंह एवं अन्य की ओर से दायर की गई है। इसमें JPSC की विज्ञापन संख्या 18/2023 के तहत आयोजित फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने इस मामले में भी नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगाई है और राज्य सरकार तथा JPSC को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

CID जांच के बाद सरकार ने लिया था फैसला

JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार ने जांच का फैसला लिया है। CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सरकार ने उन परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया, जिनमें TDPL की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। इसके अलावा वर्ष 2014 से अब तक आयोजित भर्ती परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की भी जांच कराई जा रही है।

कार्मिक विभाग की अधिसूचना के अनुसार कुल 45 परीक्षाओं को जांच एवं कार्रवाई के दायरे में रखा गया है। इनमें 22 परीक्षाएं रद्द, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित तथा 17 परीक्षाओं को संभावित अनियमितताओं की जांच के दायरे में रखा गया है।

सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है। वहीं चयनित अभ्यर्थियों का तर्क है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन पूरी चयन प्रक्रिया में सफल अभ्यर्थियों को सामूहिक रूप से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।

अगली सुनवाई पर टिकी नजर

हाईकोर्ट का आदेश फिलहाल अंतरिम है। नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के फैसले पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। राज्य सरकार और JPSC को अपना जवाब दाखिल करना होगा, जिसके बाद अदालत मामले के कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर आगे सुनवाई करेगी। ऐसे में अब चयनित अभ्यर्थियों के साथ-साथ पूरे राज्य की नजर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है।

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Author: haqeeqatnaama