पंचायती राज विभाग के दो बड़े आदेश जारी, पंचायत सहायकों की भूमिका हुई स्पष्ट, पहचान पत्र बनाने का निर्देश; संगठन में भी दो फाड़, 5 अगस्त के आंदोलन पर आमने-सामने दोनों गुट

रांची, 4 अगस्त। झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग ने मंगलवार को पंचायत सहायकों को लेकर दो महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। विभाग द्वारा जारी पत्रों में एक ओर पंचायत सचिवालय में कार्यरत पंचायत सहायकों की जिम्मेदारियां स्पष्ट की गई हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य के सभी उपायुक्तों को पंचायत सहायकों का आधिकारिक पहचान पत्र (आई-कार्ड) निर्गत करने का निर्देश दिया गया है। इन आदेशों के बीच राज्य स्तरीय पंचायत सहायक संघ के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद भी खुलकर सामने आ गया है। 5 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव को लेकर संगठन दो गुटों में बंटा नजर आ रहा है।

पंचायती राज विभाग के उप निदेशक द्वारा जारी पत्र संख्या 2339 में राज्य के सभी जिला पंचायत राज पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि पंचायत सचिवालय में कार्यरत पंचायत सहायकों से विभाग द्वारा निर्धारित कार्य लिए जाएं। आदेश में कहा गया है कि पंचायत सहायक गांव स्तर पर संचालित विकास योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाएंगे, स्वयं सहायता समूहों एवं समुदाय आधारित संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे, पात्र लाभुकों को सरकारी योजनाओं से जोड़ेंगे, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, आईसीडीएस एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराएंगे। साथ ही ग्राम पंचायत की वार्षिक कार्य योजना तैयार करने में भी सहयोग करेंगे।

इसी दिन जारी एक अन्य पत्र में विभाग ने सभी उपायुक्तों को पंचायत सहायकों का आधिकारिक पहचान पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। विभाग ने माना है कि वर्तमान में कार्यरत पंचायत सहायकों के पास पंचायत सहायक के रूप में अधिकृत पहचान पत्र उपलब्ध नहीं है, जिससे क्षेत्र में कार्य करने, आम जनता के बीच अपनी पहचान स्थापित करने और विभिन्न विभागों के साथ समन्वय बनाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सभी जिलों को पंचायत सहायकों के पदनाम अंकित पहचान पत्र निर्गत करने की आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। इस पत्र की प्रतिलिपि प्रदेश अध्यक्ष मिथुन कुमार यादव एवं प्रदेश सचिव बाबूलाल करमाली को भी सूचनार्थ भेजी गई है।

संगठन में बढ़ी खींचतान

सरकार के इन आदेशों के बीच राज्य स्तरीय पंचायत सहायक संघ दो गुटों में बंटा दिखाई दे रहा है। एक गुट पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चन्द्रदीप के साथ है, जबकि दूसरा गुट वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मिथुन कुमार यादव के नेतृत्व का समर्थन कर रहा है।

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चन्द्रदीप के समर्थक पहले ही 5 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव की घोषणा कर चुके हैं। उनका कहना है कि वर्तमान प्रदेश नेतृत्व पंचायत सहायकों की लंबित मांगों पर कोई ठोस उपलब्धि हासिल नहीं कर पाया है, इसलिए आंदोलन आवश्यक है।

वहीं दूसरी ओर अध्यक्ष मिथुन कुमार यादव और सचिव बालदेव करमाली के नेतृत्व वाली प्रदेश कमेटी ने मुख्यमंत्री आवास घेराव के आह्वान की घोर निंदा की है। प्रदेश कमेटी का कहना है कि सरकार के साथ सकारात्मक वार्ता चल रही है और संगठन को लगातार लाभ मिल रहा है। कमेटी का दावा है कि पंचायत सहायकों को विशेष लाभ दिलाने तथा उनकी विभिन्न मांगों के समाधान के लिए सरकार के साथ गंभीर स्तर पर बातचीत जारी है। ऐसे में आंदोलन की बजाय संवाद के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। मिथुन कुमार यादव के नेतृत्व वाली प्रदेश कमेटी ने मुख्यमंत्री आवास घेराव वाला आंदोलन का खंडन किया है

सरकारी आदेश के बीच बढ़ी हलचल

पंचायती राज विभाग द्वारा एक ही दिन पंचायत सहायकों की जिम्मेदारियां तय करने और पहचान पत्र जारी करने जैसे महत्वपूर्ण आदेश जारी किए जाने के बाद पंचायत सहायकों के बीच नई उम्मीद जगी है। हालांकि, संगठन के भीतर नेतृत्व को लेकर जारी मतभेद और 5 अगस्त के आंदोलन को लेकर दो अलग-अलग रणनीतियों ने इस पूरे घटनाक्रम को और भी चर्चा का विषय बना दिया है। अब सबकी नजर सरकार और पंचायत सहायक संगठनों के बीच होने वाली आगामी वार्ता और उसके परिणाम पर टिकी हुई है।

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Author: haqeeqatnaama