केंद्रीय सरना समिति का प्रदर्शन: धर्मांतरित आदिवासियों को ‘दोहरे लाभ’ से हटाने की मांग

केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की के नेतृत्व में शुक्रवार को लोकभवन के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन धर्मांतरित आदिवासियों द्वारा आरक्षण और सरकारी योजनाओं में मिल रहे कथित ‘दोहरे लाभ’ के विरोध में था। प्रदर्शन की शुरुआत पाहन (पुजारी) द्वारा पारंपरिक पूजा से हुई। इसी दौरान विरोध को और मुखर करते हुए समिति की महिला अध्यक्ष निशा भगत ने अपना मुंडन भी कराया।

​🗣️ ‘आदिवासी पहचान से दूर हुए लोग न लें लाभ’

​प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि झारखंड एक आदिवासी बहुल राज्य है। उनका आरोप है कि धर्मांतरण के बाद जो लोग अपनी मूल आदिवासी पहचान और परंपराओं से दूर हो चुके हैं, वे अभी भी आरक्षण और विभिन्न सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ उठा रहे हैं।

​अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट परंपराएं और प्रथाएं हैं, और जिन लोगों ने इन प्रथाओं को त्याग दिया है, उन्हें तत्काल आदिवासी सूची से डिलिस्ट (सूची से बाहर) किया जाना आवश्यक है।

​🚫 अंतर-धार्मिक विवाह और पेसा कानून का मुद्दा

  • जय मंगल उरांव का आरोप: सामाजिक कार्यकर्ता जय मंगल उरांव ने आरोप लगाया कि कुछ मुस्लिम परिवार आदिवासी बेटियों से विवाह कर लेते हैं और फिर मायके पक्ष से जाति और आवासीय प्रमाण पत्र बनवाकर आदिवासी समुदाय के लिए बनी योजनाओं का अनुचित लाभ उठा रहे हैं।
  • निशा भगत का वक्तव्य: महिला अध्यक्ष निशा भगत ने कहा कि झारखंड पांचवीं अनुसूची का राज्य है, इसके बावजूद पेसा कानून (PESA Act) अब तक लागू नहीं हो सका है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईसाई समुदाय के धर्मांतरित लोग आदिवासी आरक्षण का लाभ लेकर मंत्री, सांसद और विधायक तक बन रहे हैं, जिससे मूल आदिवासी समाज के अधिकार बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

​प्रदर्शन में संजय तिर्की, एंजेल लकड़ा, निरा टोप्पो, प्रमोद एक्का, विनय उरांव, पंचम तिर्की, सोहन कच्छप, हंदु भगत सहित केंद्रीय सरना समिति के कई सदस्य उपस्थित थे।

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Author: haqeeqatnaama

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