वन्यजीवों के रक्षक बने रेलकर्मी: चक्रधरपुर रेल मंडल को ‘हाथियों की सुरक्षा’ के लिए मिला सम्मान

चक्रधरपुर (पश्चिमी सिंहभूम), 24 दिसंबर। भारतीय रेलवे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण और वन्यजीवों का संरक्षण भी उसकी प्राथमिकताओं में सर्वोपरि है। चक्रधरपुर रेलवे डिवीजन को हाथियों के प्रति संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय लेने के लिए बुधवार को ‘वन्यजीव ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

एक संवेदनशील फैसला, सुरक्षित बचे 22 गजराज

​यह सम्मान एक विशेष घटना के लिए दिया गया, जिसने रेलवे की तत्परता की मिसाल पेश की। बिसरा और बोंदामुंडा केबिन ‘ए’ के बीच रेलखंड पर जब 22 हाथियों के एक झुंड की मौजूदगी की सूचना मिली, तो रेल प्रशासन ने बिना समय गंवाए लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन अस्थायी रूप से रोक दिया। इस त्वरित फैसले के कारण हाथियों का पूरा झुंड सुरक्षित रूप से ट्रैक पार कर सका और एक संभावित रेल-वन्यजीव दुर्घटना टल गई।

डीआरएम सभागार में गरिमामयी सम्मान समारोह

​चक्रधरपुर स्थित डीआरएम (DRM) सभागार में आयोजित इस समारोह में मंडल रेल प्रबंधक तरुण हुरिया को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वन्यजीव ट्रस्ट ऑफ इंडिया के प्रतिनिधियों ने रेलवे के उन अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना की, जिन्होंने संकट के समय सूझबूझ का परिचय दिया।

“वन विभाग के साथ निरंतर समन्वय और समय रहते ट्रेन संचालन को नियंत्रित करना ही वन्यजीव संरक्षण की दिशा में हमारा सबसे प्रभावी कदम है। यह सम्मान सह-अस्तित्व के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

तरुण हुरिया, डीआरएम, चक्रधरपुर रेल मंडल

 

चुनौतीपूर्ण रूट पर सफलता की कहानी

​हावड़ा-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर स्थित चक्रधरपुर डिवीजन देश के सबसे व्यस्ततम रेल खंडों में से एक है। यह क्षेत्र झारखंड और ओडिशा के घने जंगलों से घिरा हुआ है, जो हाथियों का प्राकृतिक गलियारा (Corridor) है।

  • भौगोलिक चुनौती: घने जंगल और पहाड़ियों के बीच से गुजरने वाले इस ट्रैक पर अक्सर हाथियों की आवाजाही होती है।
  • समन्वय: रेलवे और वन विभाग के बीच बेहतर सूचना तंत्र ने इस क्षेत्र में दुर्घटनाओं को न्यूनतम करने में सफलता पाई है।

निष्कर्ष

​यह पहल केवल एक पुरस्कार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के अन्य रेल मंडलों के लिए भी एक रोल मॉडल है कि कैसे तकनीकी विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

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Author: haqeeqatnaama

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