​”लोकतंत्र केवल वोट तक सीमित नहीं”: रांची में बोले विशेषज्ञ, युवाओं से ‘झंडा उठाने’ के बजाय ‘सवाल पूछने’ का आह्वान

रांची | 25 जनवरी, 2026

​लोकतंत्र की मजबूती और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करने के लिए रविवार को रांची प्रेस क्लब में एक महत्वपूर्ण विचार-गोष्ठी का आयोजन किया गया। यूथ फोरम झारखंड के तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी का विषय “यूथ, डेमोक्रेसी एंड आइडिया ऑफ इंडिया” रहा। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं ने एक सुर में कहा कि सचेत और प्रश्न करने वाला युवा ही लोकतंत्र का असली प्रहरी है।

​युवाओं की भागीदारी केवल ‘प्रतीकात्मक’ क्यों?

​कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए यूथ फोरम झारखंड के अध्यक्ष कशिफुल इस्लाम ने आज की राजनीति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा:

​”आज युवाओं की भागीदारी को केवल ‘झंडा उठाने’ और रैलियों की भीड़ बढ़ाने तक सीमित कर दिया गया है। लोकतंत्र तब मजबूत होगा जब युवा निर्णय लेने वाली मेज पर बैठेंगे और अपनी बात मजबूती से रखेंगे।”

 

​आइडिया ऑफ इंडिया: विविधता में एकता

​मुख्य वक्ता प्रो. मिथिलेश सिंह ने ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत की पहचान इसकी बहुलता और संवैधानिक मूल्यों में निहित है। उन्होंने युवाओं को आगाह किया कि वे देश को किसी संकीर्ण विचारधारा के चश्मे से देखने के बजाय उसके ऐतिहासिक और सामाजिक ताने-बाने को समझें।

वक्ताओं के मुख्य विचार:

​विचार-गोष्ठी में कई बुद्धिजीवियों ने अपनी बात रखी, जिनके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • शंभू नाथ (अध्यक्ष, रांची प्रेस क्लब): “युवा होना केवल उम्र का पैमाना नहीं, बल्कि एक प्रगतिशील सोच है। युवाओं को प्रश्न पूछने की अपनी शक्ति को कभी कम नहीं होने देना चाहिए।”
  • लईक़ अहमद खान (अतिथि वक्ता): “लोकतंत्र एक सतत प्रक्रिया है। जब लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर होती हैं, तो देश का मूल विचार (आइडिया ऑफ इंडिया) खतरे में पड़ जाता है।”
  • अबू तलहा अब्दाल: उन्होंने युवाओं के बीच बढ़ती ‘हेट स्पीच’ और ‘ब्लाइंड फॉलोइंग’ (अंधानुकरण) पर चिंता जताते हुए सक्रिय नागरिक बनने की अपील की।

​चुनौतियों पर गंभीर विमर्श

​संगोष्ठी के दौरान बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, भ्रामक सूचनाओं (Misinformation) का प्रसार और नफरत की राजनीति जैसे ज्वलंत मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने माना कि इन चुनौतियों से लड़ने के लिए युवाओं को संवैधानिक मूल्यों के साथ मजबूती से खड़ा होना होगा।

​कार्यक्रम का सफल संचालन

​इस वैचारिक संवाद का संचालन नदीम खान ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सचिव मोहम्मद रैहान ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में समर फिरदौस, बिनय ओरांव, एस. अली, अवधेश कुमार और निशाद आलम सहित बड़ी संख्या में छात्र संगठनों के प्रतिनिधि और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

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Author: haqeeqatnaama

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