रांची | 25 जनवरी, 2026
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय और गैर-राजनीतिक जनसंवाद कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 130वें एपिसोड का रविवार को देशभर में प्रसारण हुआ। झारखंड में भी इसे लेकर व्यापक उत्साह देखा गया, जहाँ प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी सहित लाखों कार्यकर्ताओं ने बूथ स्तर पर इस संबोधन को सुना।
वासुकीनाथ में आदित्य साहू ने सुनी ‘मन की बात’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू ने अपने सांगठनिक प्रवास के दौरान बाबा वासुकीनाथ धाम में पूजा-अर्चना की और फिर स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा:
”प्रधानमंत्री का यह संबोधन भारत की प्रगति और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत दस्तावेज है। यह न केवल देश की पारिवारिक व्यवस्था को मजबूत करता है, बल्कि नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति और राष्ट्र सेवा से जुड़ने के लिए प्रेरित करता है।”
”मिट्टी से जुड़ने का संदेश”: बाबूलाल मरांडी
रांची के धुर्वा में कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम सुनने के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इसे आत्मनिर्भर भारत का विजन बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का संबोधन हमें अपनी जड़ों और गौरवशाली अतीत पर गर्व करना सिखाता है, जो ‘विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में एक बड़ा आह्वान है।
बूथ स्तर पर जुटा भाजपा नेतृत्व
झारखंड के कोने-कोने में संगठन के बड़े पदाधिकारियों ने कार्यकर्ताओं के साथ इस कार्यक्रम में भाग लिया:
- नागेंद्र त्रिपाठी (क्षेत्रीय संगठन महामंत्री): सुखदेव नगर मंडल, रांची में शामिल हुए।
- कर्मवीर सिंह (प्रदेश संगठन महामंत्री): हरमू क्षेत्र में सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ शिरकत की।
- प्रमुख उपस्थिति: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अभयकांत प्रसाद, बालमुकुंद सहाय और मुन्ना मिश्र सहित कई दिग्गज नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में कार्यक्रम को सुना।
नई पीढ़ी से विशेष अपील
आदित्य साहू ने राज्य के युवाओं और नई पीढ़ी से अपील की कि वे ‘मन की बात’ को नियमित रूप से सुनें। उन्होंने कहा कि भजनों और सांस्कृतिक चर्चाओं के माध्यम से प्रधानमंत्री जिस तरह युवाओं को जोड़ रहे हैं, वह भारत की सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने वाला है।
झारखंड के सभी प्रमंडलों और बूथों पर इस कार्यक्रम को लेकर न केवल भाजपा कार्यकर्ताओं, बल्कि आम नागरिकों में भी विशेष उत्साह देखा गया, जिसे सामूहिक चर्चाओं के माध्यम से एक उत्सव का रूप दिया गया।