तालाब की खुदाई में मिली 1200 साल पुरानी उमा महेश्वर प्रतिमा, दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

झारखंड के चतरा जिले में तालाब की खुदाई के दौरान करीब 1200 साल पुरानी प्राचीन प्रतिमा और पुरातात्विक अवशेष मिलने से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। इटखोरी प्रखंड के करनी गांव स्थित बामणी तालाब से मिट्टी निकालने के दौरान यह प्रतिमा मिली। सूचना फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए और प्रतिमा की पूजा-अर्चना शुरू कर दी।

जानकारी के अनुसार, शनिवार को बामणी तालाब में जेसीबी और ट्रैक्टर से मिट्टी की खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान जेसीबी चालक विकास कुमार दांगी की नजर काले पत्थर की एक प्रतिमा पर पड़ी। ग्रामीण श्रवण कुमार वर्मा ने बताया कि करीब 2 से 3 फीट नीचे खुदाई करने पर ढाई से तीन फीट ऊंची काले पत्थर से बनी प्रतिमा और नक्काशीदार पत्थर मिला।

प्रतिमा मिलने की खबर के बाद ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। लोगों ने प्रतिमा को साफ कर पीपल के पेड़ के नीचे स्थापित किया और विधिवत पूजा-अर्चना शुरू कर दी। ग्रामीण इसे आस्था और चमत्कार से जोड़कर देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब यहां मंदिर निर्माण कर प्रतिमा की स्थापना करने की योजना है।

पुरातत्वविद डॉ. उदेश कुमार ने प्रतिमा को पालकालीन बताते हुए कहा कि यह 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच की प्रतीत होती है। उन्होंने बताया कि यह उमा महेश्वर की कलात्मक प्रतिमा है, जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती को आलिंगन मुद्रा में दर्शाया गया है। प्रतिमा में शिवजी के चरणों के नीचे नंदी और माता पार्वती के चरणों के नीचे सिंह की आकृति उकेरी गई है, जो शिव-पार्वती के प्रेम और पारिवारिक स्वरूप को दर्शाती है।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज, नई दिल्ली के सहायक प्रोफेसर डॉ. ललित कुमार ने बताया कि इटखोरी और आसपास के क्षेत्रों में पहले भी कई प्राचीन प्रतिमाएं और अवशेष मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि इटखोरी से मयूरहंड क्षेत्र के बीच पुरातत्व विभाग ने 12 से 15 उमा महेश्वर प्रतिमाओं को चिन्हित किया है। यह क्षेत्र पालकालीन सभ्यता और धरोहरों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

प्रतिमा मिलने के बाद करनी गांव समेत आसपास के क्षेत्रों में लोगों में काफी उत्सुकता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पूजा कर रहे हैं और इसे क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में देख रहे हैं।

Lucky Sahu
Author: Lucky Sahu