झारखंड उच्च न्यायालय में शुक्रवार को अधिवक्ता महेश तिवारी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। यह याचिका रांची सिविल कोर्ट द्वारा सजा पर रोक लगाने संबंधी उनकी अपील खारिज किए जाने के खिलाफ दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने महेश तिवारी को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 25 जून निर्धारित की है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। सरकार ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता ने सजा पर रोक लगाने के अंतरिम आवेदन (आईए) को खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी है, जबकि इस तरह की याचिका विधिक रूप से विचारणीय नहीं है।
राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने महेश तिवारी को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक विनीत कुमार वशिष्ठ ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, रांची सिविल कोर्ट के प्रधान न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा की अदालत ने महेश तिवारी की सजा पर रोक लगाने संबंधी मिसलेनियस अपील को खारिज कर दिया था। इसके साथ ही दोषसिद्धि के खिलाफ दायर उनकी अपील को अपर न्यायायुक्त कुलदीप की अदालत में सुनवाई के लिए स्थानांतरित कर दिया गया था।
महेश तिवारी ने अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए सिविल कोर्ट में अपील दायर की थी। इसके साथ ही उन्होंने सजा पर रोक लगाने के लिए अलग से मिसलेनियस अपील दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया।
गौरतलब है कि झारखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता महेश तिवारी को रांची सिविल कोर्ट के न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने महिला अधिवक्ता ऋतु कुमार के साथ मारपीट से जुड़े मामले में दोषी करार देते हुए दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। अब 25 जून को होने वाली सुनवाई में हाई कोर्ट याचिका की सुनवाई योग्यता सहित अन्य कानूनी बिंदुओं पर विचार करेगा।