नक्सलियों पर भारी पड़ा पुलिस का दबाव: PLFI कमांडर आलोक यादव ने किया सरेंडर, सरकार की नीति से प्रभावित होकर छोड़ा हथियार

लातेहार, 19 दिसंबर। झारखंड में नक्सली संगठनों के खिलाफ जारी पुलिसिया अभियान को शुक्रवार को एक बड़ी कामयाबी मिली है। कुख्यात नक्सली संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (PLFI) के एरिया कमांडर और एक लाख रुपये के इनामी नक्सली आलोक यादव ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला करते हुए लातेहार पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।

​हथियार के साथ एसपी कार्यालय पहुंचे एरिया कमांडर

​शुक्रवार को लातेहार पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के सभागार में आयोजित एक आधिकारिक कार्यक्रम में आलोक यादव ने एसपी कुमार गौरव के समक्ष सरेंडर किया। आत्मसमर्पण के साथ ही उसने एक देसी कार्बाइन और चार जिंदा कारतूस भी पुलिस को सौंपे। आलोक यादव मूल रूप से लातेहार के बालूमाथ थाना क्षेत्र का रहने वाला है।

​35 से अधिक कांडों में था वांछित

​एसपी कुमार गौरव ने प्रेस को संबोधित करते हुए बताया कि आलोक यादव कोई साधारण नक्सली नहीं है। उसके खिलाफ राज्य के विभिन्न थानों में हत्या, लेवी और आगजनी जैसे 35 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। लंबे समय से वह लातेहार और आसपास के जिलों में पीएलएफआई की गतिविधियों का नेतृत्व कर रहा था।

​”मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त होगा क्षेत्र”

​एसपी ने बताया कि क्षेत्र में पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे सघन सर्च ऑपरेशन के दबाव और सरकार की आकर्षक ‘आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति’ से प्रभावित होकर आलोक ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

​एसपी कुमार गौरव ने इस अवसर पर अन्य नक्सलियों को भी कड़ी चेतावनी और सलाह देते हुए कहा:

“हमारा लक्ष्य मार्च 2026 तक पूरे क्षेत्र को नक्सलमुक्त बनाना है। नक्सलियों के पास अभी भी मौका है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें और सरकार की नीति का लाभ उठाएं। अन्यथा, उन्हें सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।”

 

​मौके पर मौजूद रहे दिग्गज अधिकारी

​इस महत्वपूर्ण आत्मसमर्पण कार्यक्रम में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। मौके पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) के कमांडेंट राजेश सिंह, सीआरपीएफ के कमांडेंट यादराम बुनकर, द्वितीय कमान अधिकारी आरसी मिश्रा, और डीएसपी अरविंद कुमार समेत कई वरीय अधिकारी मौजूद थे।

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Author: haqeeqatnaama

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