रामगढ़, 14 जून (हि.स.)। रामगढ़ जिले के अरगड्डा प्रक्षेत्र में अवैध कोयला खदान (चाल) में दम घुटने से चार युवकों की मौत के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हादसे के लिए जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और सीसीएल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध खनन पर समय रहते कार्रवाई नहीं होने और राहत-बचाव कार्य में देरी के कारण चार युवकों की जान चली गई।
रविवार को रामगढ़ पहुंचे बाबूलाल मरांडी ने हादसे में मृत युवकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की विफलता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अरगड्डा क्षेत्र के बुमरी पंचायत अंतर्गत चपरी बस्ती स्थित काजू बागान जंगल में चल रही अवैध खदान कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
मरांडी ने मृतकों की पहचान किशोर रवानी, आशीष रजवार, देवा कुमार बेदिया और डब्बू बेदिया के रूप में बताते हुए कहा कि चारों युवक अपने परिवारों के सहारा थे। उन्होंने आरोप लगाया कि रामगढ़ जिले के कई इलाकों में लंबे समय से अवैध खनन का कारोबार चल रहा है, जिसकी जानकारी प्रशासन, पुलिस और सीसीएल अधिकारियों को भी है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती।
उन्होंने कहा कि अवैध खदानों की निगरानी और उन्हें रोकने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की है। यदि समय रहते कदम उठाए जाते तो यह हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने कहा कि चार युवकों की मौत के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
बाबूलाल मरांडी को जानकारी मिली कि मृतक किशोर रवानी और आशीष रजवार का अंतिम संस्कार बुध बाजार स्थित श्मशान घाट में किया जा रहा है। इसके बाद उन्होंने अपना कार्यक्रम बदलकर श्मशान घाट पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को सड़क से लेकर विधानसभा तक उठाएगी।
इसके बाद मरांडी टोंगी गांव पहुंचे और मृतक देवा कुमार बेदिया तथा डब्बू बेदिया के परिवारों से मुलाकात की। ग्रामीणों ने उन्हें घटना की पूरी जानकारी दी। ग्रामीणों के अनुसार, सबसे पहले डब्बू बेदिया अवैध खदान में फंसे थे। उन्हें बचाने के लिए देवा कुमार बेदिया खदान में उतरे, लेकिन जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण वह भी बाहर नहीं निकल सके। बाद में किशोर रवानी और आशीष रजवार भी बचाने पहुंचे, लेकिन चारों की दम घुटने से मौत हो गई।
मरांडी ने राहत एवं बचाव अभियान में देरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे हादसों में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, लेकिन प्रशासन और रेस्क्यू टीम के पहुंचने में देरी हुई। उन्होंने पूछा कि सूचना मिलने के बाद बचाव दल घटनास्थल तक देर से क्यों पहुंचा और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
नेता प्रतिपक्ष ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि अवैध खनन को संरक्षण देने वालों की पहचान कर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को खत्म नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि प्रशासनिक और संस्थागत जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
उन्होंने राज्य सरकार से मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को रोजगार और मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की।