पूर्वी सिंहभूम, 17 जून (हि.स.)। जमशेदपुर स्थित बिष्टुपुर के टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क (टाटा जू) में 16 वर्षीय अफ्रीकी शेरनी जोया का निधन हो गया। बढ़ती उम्र और लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उसकी हालत लगातार खराब हो रही थी। जू के पशु चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज किया जा रहा था, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
जोया के निधन से टाटा जू प्रशासन, वन्यजीव प्रेमियों और शहरवासियों में शोक की लहर है। जू प्रबंधन के अनुसार, जोया को करीब छह माह की उम्र में दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया से भारत लाया गया था। उसके साथ जम्बो और एड नाम के दो अन्य अफ्रीकी शेर भी टाटा जू पहुंचे थे। पिछले 16 वर्षों से वह जू का हिस्सा रही और लाखों पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी रही।
जू अधिकारियों ने बताया कि जोया का स्वभाव बेहद शांत था। वह अपने बाड़े में सक्रिय रहती थी और बच्चों व पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय थी। समय के साथ वह केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि टाटा जू परिवार का अभिन्न हिस्सा बन गई थी।
जोया के निधन के बाद नियमानुसार वन विभाग और पशुपालन विभाग को सूचना दी गई। वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की मौजूदगी में शव परीक्षण किया गया और पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई। मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए बिसरा सुरक्षित रखकर भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) भेजा जाएगा।
शव परीक्षण के बाद टाटा जू परिसर में ही जोया का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों ने उसे श्रद्धांजलि दी और उसके साथ बिताए वर्षों को याद किया।
टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क के निदेशक डॉ. नईम अख्तर ने बताया कि जोया काफी उम्रदराज हो चुकी थी और पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रही थी। विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख के बावजूद उसकी मृत्यु हो गई। उन्होंने कहा कि बिसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। उन्होंने बताया कि जोया ने अपने जीवन के 16 वर्ष टाटा जू में बिताए और वह यहां आने वाले लाखों आगंतुकों के लिए यादगार रही।