एक मरीज की दो ब्लड ग्रुप रिपोर्ट, जांच की मांग तेज

पश्चिमी सिंहभूम जिले के सदर अस्पताल चाईबासा में भर्ती मरीज सुरेंद्र बोयपाई के ब्लड ग्रुप को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मरीज की दो अलग-अलग जांच रिपोर्ट सामने आई हैं, जिनमें ब्लड ग्रुप अलग-अलग दर्ज है।

सदर अस्पताल की पैथोलॉजी रिपोर्ट में सुरेंद्र बोयपाई का ब्लड ग्रुप एबी पॉजिटिव बताया गया है, जबकि कुछ दिनों बाद निजी लैब की जांच रिपोर्ट में उनका ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव दर्ज किया गया। दोनों रिपोर्टों में अंतर आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।

एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष रामहरि पेरियार ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि ब्लड ग्रुप जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सकीय जानकारी में इस तरह की असमानता गंभीर विषय है। जिला प्रशासन, सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग को तकनीकी व प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की जांच करनी चाहिए।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में किसी व्यक्ति का ब्लड ग्रुप जीवनभर नहीं बदलता। ऐसे में अलग-अलग रिपोर्ट आने के पीछे सैंपल लेने में गलती, नमूने की अदला-बदली, जांच प्रक्रिया में तकनीकी त्रुटि या रिकॉर्ड में गड़बड़ी जैसी वजहें हो सकती हैं।

विशेषज्ञों ने बताया कि गलत ब्लड ग्रुप के आधार पर रक्त चढ़ाने की स्थिति में मरीज को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि सुरेंद्र बोयपाई के मामले में ऐसी कोई घटना हुई है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

रामहरि पेरियार ने मांग की है कि ब्लड बैंक के रिकॉर्ड, क्रॉस-मैचिंग रिपोर्ट, रक्त निर्गमन रजिस्टर, दोनों जांच रिपोर्ट और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर पूरी स्थिति सार्वजनिक की जाए। उनका कहना है कि यह मामला केवल एक मरीज तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में लोगों के भरोसे और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

Lucky Sahu
Author: Lucky Sahu