झारखंड में गंडा समाज को अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा देने की मांग को लेकर शुक्रवार को समाज के लोगों ने पूर्वी सिंहभूम उपायुक्त कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद समाज के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर समुदाय को एससी सूची में शामिल करने की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में गंडा जाति को अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है, लेकिन झारखंड में समान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद इस समुदाय को अब तक एससी सूची में शामिल नहीं किया गया है। इसके कारण लोगों को जाति प्रमाण पत्र, छात्रवृत्ति, आरक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी हो रही है।
समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि गंडा समाज लंबे समय से सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक पिछड़ेपन का सामना कर रहा है। एससी का दर्जा मिलने से समुदाय के लोगों को संवैधानिक अधिकारों के साथ शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
राज क्लब गंडा समाज के अध्यक्ष नरेश कुमार टांडिया ने बताया कि झारखंड के विभिन्न जिलों में गंडा समाज के करीब डेढ़ लाख लोग निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज लंबे समय से अपनी मांग को लेकर संघर्ष कर रहा है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने बताया कि राज्य गठन के समय समाज को उम्मीद थी कि उनकी वर्षों पुरानी मांग पूरी होगी, लेकिन स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई कर गंडा समाज को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांग पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई तो समाज लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और अधिकारों की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान नरेश कुमार टांडिया, फूलचंद राय, धर्मेंद्र दीप, हिरण बीथ, कृपा नाग, मोतीलाल करन, सुमित्रा सागर, शंकर टांडिया, रेखा महानंद, सागर सोना, सोनू सोना सहित बड़ी संख्या में समाज के महिला-पुरुष सदस्य मौजूद थे।