पश्चिमी सिंहभूम में सुरक्षा बलों की ओर से चलाए जा रहे लगातार नक्सल विरोधी अभियानों के बीच इनामी नक्सली रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन के पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम और दलमा क्षेत्र में सक्रिय होने की सूचना मिली है। खुफिया इनपुट के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
इधर, दलमा आंचलिक सुरक्षा समिति के केंद्रीय महासचिव एवं बोड़ाम निवासी रामकृष्ण महतो ने शुक्रवार को क्षेत्र में सक्रिय नक्सलियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की।
उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति नक्सली गतिविधियों से जुड़े लोगों को सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत का अवसर देती है। आत्मसमर्पण करने वाले लोग अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सामान्य जीवन जी सकते हैं।
रामकृष्ण महतो ने हाल में आत्मसमर्पण करने वाली महिला नक्सली शकुंतला महतो उर्फ वर्षा उर्फ पुष्पा के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि वर्षा बेहद कम उम्र में नक्सली संगठन से जुड़ गई थी और करीब 25 वर्षों तक जंगलों में संगठन के साथ रही।
उन्होंने कहा कि वर्षा ने वर्ष 2004 में दलमा क्षेत्र के भ्रमण के दौरान नक्सलवाद को एक ऐसे दलदल की तरह बताया था, जिसमें प्रवेश करना आसान लेकिन बाहर निकलना बेहद कठिन होता है। उनके अनुसार, संगठन की गतिविधियों से असंतुष्ट होने के बावजूद परिस्थितियों के कारण वह लंबे समय तक अलग नहीं हो सकी।
रामकृष्ण महतो ने बताया कि वर्षा को उसके चाचा अर्जुन महतो ने नक्सली संगठन से जोड़ा था। अर्जुन महतो पर कई गंभीर मामले दर्ज थे और करीब एक दशक पहले घाटशिला क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई थी।
उन्होंने रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन समेत मीता, सागर, रवि और दलमा क्षेत्र में सक्रिय अन्य नक्सलियों से हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हिंसा किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है और समाज व परिवार के बीच सम्मानजनक जीवन ही बेहतर भविष्य का रास्ता है।