गढ़वा, 10 जुलाई (हि.स.)। गढ़वा जिले के वन प्रमंडल रंका अंतर्गत सीमावर्ती सिंजो गांव में शुक्रवार तड़के जंगली हाथी के हमले में एक ग्रामीण की मौत हो गई। मृतक की पहचान सिंजो निवासी इंद्रदेव यादव (50) के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और शोक का माहौल है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 3:30 बजे इंद्रदेव यादव घर से बाहर निकले थे। इसी दौरान गांव के आसपास घूम रहे एक जंगली हाथी ने उन पर अचानक हमला कर दिया। हाथी ने उन्हें सूंड से उठाकर कई बार जमीन पर पटक दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटना इतनी अचानक हुई कि परिजनों और ग्रामीणों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। शोर मचाकर लोगों ने किसी तरह हाथी को गांव से दूर भगाया, लेकिन तब तक इंद्रदेव यादव की जान जा चुकी थी।
घटना की सूचना मिलते ही पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि एवं समाजसेवी पप्पू कुमार यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए वन विभाग से तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। वन प्रमंडल पदाधिकारी एनी बेनी अब्राहम के निर्देश पर विभाग ने रेंजर अजय टोप्पो के माध्यम से मृतक के आश्रितों को तत्काल एक लाख रुपये की अनुग्रह सहायता प्रदान की।
इसके बाद वनपाल राजीव कुमार पांडेय और रंका थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया तथा हाथियों की गतिविधियों की जानकारी जुटाई।
ग्रामीणों का कहना है कि सिंजो और आसपास के गांवों में पिछले कई महीनों से जंगली हाथियों का आतंक बना हुआ है। हाथियों के झुंड अक्सर रात के समय गांवों में घुसकर फसलों और मकानों को नुकसान पहुंचाते हैं। ग्रामीणों का दावा है कि हाथियों के हमलों में अब तक करीब 12 लोगों की जान जा चुकी है और कई अन्य घायल हुए हैं।
वन प्रमंडल पदाधिकारी एनी बेनी अब्राहम ने बताया कि यह इलाका हाथियों का प्राकृतिक कॉरिडोर है, जिसके कारण उनकी आवाजाही लगातार बनी रहती है। उन्होंने कहा कि वन विभाग हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन सीमावर्ती वन क्षेत्र होने के कारण वे दोबारा गांवों की ओर लौट आते हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि हाथी दिखाई देने पर अकेले बाहर न निकलें, सुरक्षित दूरी बनाए रखें और तत्काल वन विभाग को सूचना दें। साथ ही हाथियों को भगाने के लिए मशाल, ढोल-नगाड़े, सायरन या तेज आवाज वाले उपकरणों का उपयोग केवल सामूहिक रूप से और पूरी सावधानी के साथ करने की